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क्या हम प्रकृति के विपरीत जा रहे हैं?
Jyotish Sagar
|May 2022
अखिल विश्व ब्रह्माण्ड पंचतत्त्वों का मूर्त रूप है । इन पाँचों तत्त्वों में थोड़ा-सा भी असन्तुलन हुआ, तो सब-कुछ नष्ट हो जाता है।
प्रकृति हमें जीवनदायिनी ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे हमारे जीवन का अस्तित्व है। आज हम ही उसी के दुश्मन बन बैठे हैं। यह अखिल विश्व ब्रह्माण्ड पंच महाभूतों से बना हुआ है। इनमें अगर थोड़ा-सा भी असन्तुलन होगा, तो सब-कुछ नष्ट होने में कोई समय नहीं लगेगा। हमारे स्थूल शरीर में भी इनका सन्तुलन बिगड़ने पर हम बीमार हो जाते हैं अर्थात वात्, पित्त और कफ दूष
Cette histoire est tirée de l'édition May 2022 de Jyotish Sagar.
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