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पुत्रप्राप्ति आदि मनोरथ पूर्ण करनेवाला एवं समस्त पापनाशक व्रत
Rishi Prasad Hindi
|December 2024
१० जनवरी को पुत्रदा एकादशी है। इसके माहात्म्य के बारे में पूज्य बापूजी के सत्संग-वचनामृत में आता है :
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एकादशी एक ऐसा सुंदर व्रत है कि जिसका लाभ लेनेवाले धन्य हो गये। युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा : "प्रभु ! पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का माहात्म्य आपके श्रीमुख से सुनना चाहता हूँ। उसका नाम क्या है?”
श्रीकृष्ण ने कहा : "राजन् ! पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम 'पुत्रदा' है।
यह एकादशी निःसंतान को संतान देने में बड़ी सहायक है। यह समस्त पापों का नाश करनेवाली, पुण्यदायिनी और मनोरथ पूर्ण करनेवाली उत्तम तिथि है। समस्त कामनाओं तथा सिद्धियों के दाता भगवान | नारायण इस तिथि के अधिदेवता हैं। त्रिलोकी में इससे बढ़कर दूसरी कोई तिथि नहीं है।
पूर्वकाल की बात है। भद्रावती पुरी में सुकेतुमान राजा राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम था चम्पा। राजा को राज्य-सुख था लेकिन संतान नहीं थी। संतान न होने से राजा-रानी बहुत दुःखी रहते थे कि 'हमें कोई संतान नहीं है, राज्य कौन सँभालेगा?' 'राजा के बाद और कोई ऐसा दिखाई नहीं देता जो हम लोगों का तर्पण करेगा...' यह सोच-सोचकर पितर दुःखी रहते थे।
Diese Geschichte stammt aus der December 2024-Ausgabe von Rishi Prasad Hindi.
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