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'राष्ट सर्वोपरि' की भावना से होगा भविष्य के भारत का निर्माण
Kendra Bharati - केन्द्र भारती
|Kendra Bharati - June 2023
एक राष्ट्र के लिए, विशेष रूप से भारत जैसे प्राचीन देश के लम्बे इतिहास में, ७५ वर्ष का समय बहुत छोटा प्रतीत होता है।
लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर यह कालखंड एक जीवन-यात्रा जैसा है। हमारे वरिष्ठ नागरिकों ने अपने जीवनकाल में अद्भुत परिवर्तन देखे हैं। वे गवाह हैं कि कैसे आजादी के बाद सभी पीढ़ियों ने कड़ी मेहनत की, विशाल चुनौतियों का सामना किया और स्वय अपनो भाग्य-विधाता बने। इस दौर में हमने जो कुछ सीखा है, वह सब उपयोगी साबित होगा, क्योंकि हम राष्ट्र की यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव की ओर आगे बढ़ रहे हैं। हम सब २०४७ में स्वाधीनता के शताब्दी उत्सव तक की २५ वर्ष की अवधि यानी भारत के अमृतकाल में प्रवेश कर चुके हैं।
हमारे स्वाधीनता संग्राम ने एक राष्ट्र के तौर पर भारत की नई यात्रा की रूपरेखा तैयार की थी। हमारा स्वाधीनता संग्राम उन संघर्षों और बलिदानों की अविरल धारा था, जिसने आजाद भारत के लिए कितने ही आदर्शों और सम्भावनाओं को सींचा था। पूज्य बापू ने हमें स्वराज, स्वदेशी, स्वच्छता और सत्याग्रह द्वारा भारत के सांस्कृतिक आदर्शों की स्थापना का मार्ग दिखाया। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, सरदार पटेल, बाबा साहेब आम्बेडकर, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चन्द्रशेखर आजाद जैसे अनगिनत स्वाधीनता सेनानियों ने हमें राष्ट्र के स्वाभिमान को सर्वोपरि रखने की शिक्षा दी। रानी लक्ष्मीबाई, रानी वेलु नचियार, रानी गाइदिन्ल्यू और रानी चेन्नम्मा जैसी अनेकों वीरांगनाओं ने राष्ट्ररक्षा और राष्ट्रनिर्माण में नारीशक्ति की भूमिका को नई ऊँचाई दी। संथाल क्रान्ति, पाइका क्रान्ति से लेकर कोल क्रान्ति और भील क्रान्ति ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय ( आदिवासी) योगदान को और सशक्त किया। सामाजिक उत्थान एवं देश-प्रेम के लिए 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडाजी के बलिदान से हमें प्रेरणा मिली।
हमारे पास जो कुछ भी है वह हमारी मातृभूमि का दिया हुआ है। इसलिए हमें अपने देश की सुरक्षा, प्रगति और समृद्धि के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर देने का संकल्प लेना चाहिए। हमारे अस्तित्व की सार्थकता एक महान भारत के निर्माण में ही दिखाई देगी। कन्नड़ भाषा के माध्यम से भारतीय साहित्य को समृद्ध करनेवाले महान कवि 'कुवेम्पु' ने कहा है :
नानु अलिवे, नीनु अलिवे
नम्मा एलु - बुगल मेले
मूडु-बुदु मूडु-बुदु
नवभारत - द लीले।
अर्थात्
“मैं नहीं रहूँगा
न रहोगे तुम
परन्तु हमारी अस्थियों पर
Diese Geschichte stammt aus der Kendra Bharati - June 2023-Ausgabe von Kendra Bharati - केन्द्र भारती.
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