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जानें कब सहायक है और कब बाधक है केमद्रुम योग?

Jyotish Sagar

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April 2025

यदि चन्द्रमा से द्वितीय और द्वादश भाव में कोई ग्रह नहीं हो, तो चन्द्रमा न तो किसी से प्रेरणा ले पाता है और न ही किसी को प्रेरणा दे पाता है। ऐसी स्थिति में चन्द्रमा अकेला पड़ जाता है।

- डॉ. सुकृति घोष

जानें कब सहायक है और कब बाधक है केमद्रुम योग?

जन्मपत्रिका में केमद्रुम योग को देखकर प्रायः हम मान बैठते हैं कि इस जातक की उन्नति सम्भव नहीं है। इसके जीवन में तो बाधाओं और चुनौतियों की अधिकता रहेगी, परन्तु व्यवहार में ऐसा नहीं देखा गया है। केमद्रुम योग सदैव बाधक नहीं होता, वरन् सहायक भी हो सकता है। प्रस्तुत आलेख में केमद्रुम योग के एक ओर जहाँ सैद्धान्तिक पक्ष को समझने और उन परिस्थितियों को जानने का प्रयास करेंगे, जब यह निर्बल और घातक होता है, तो वहीं दूसरी ओर यह भी देखेंगे कि कब यह सहायक होता है और कब बाधक होता है?

जैसा कि विदित है कि केमद्रुम योग चन्द्रमा से सम्बन्धित एक बड़ा योग है। मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि 'पंचतारा ग्रह' कहलाते हैं। जन्मपत्रिका के जिस भाव में चन्द्रमा स्थित हो, उसके द्वितीय भाव में सूर्य, राहु और केतु को छोड़कर, पंचतारा ग्रहों में से कोई भी ग्रह स्थित हो, तो 'सुनफा योग' बन जाता है। इसी प्रकार यदि चन्द्रमा से द्वादश भाव में सूर्य, राहु और केतु को छोड़कर पंचतारा ग्रहों में से कोई भी ग्रह स्थित हो, तो 'अनफा योग' बन जाता है। यदि चन्द्रमा से द्वितीय और द्वादश दोनों भावों में कोई ग्रह हो (सूर्य, राहु और केतु को छोड़कर), तो इसे 'दुरुधरा योग' कहते हैं। चन्द्रमा मन का कारक है। इसलिए वह जहाँ स्थित होता है, उससे द्वितीय भाव से वह प्रेरणा लेने का प्रयास करता है।

इसलिए यदि चन्द्रमा से द्वितीय भाव में यदि कोई ग्रह होता है, तो चन्द्रमा अर्थात् मन उससे प्रेरित होता है और इसके विपरीत यदि वह स्थान ग्रहों से हीन हो, तो कोई भी ग्रह चन्द्रमा रूपी मन को प्रेरित नहीं कर पाता। इसी प्रकार चन्द्रमा से द्वादश भाव में उपस्थित ग्रह के लिए चन्द्रमा स्वयं प्रेरक बनने का कार्य करता है अर्थात् वह द्वादश भाव में उपस्थित ग्रह की जिम्मेदारी उठाता है, लेकिन यदि वहाँ पर कोई ग्रह उपस्थित नहीं हो, तो चन्द्रमा किसी को भी प्रेरणा नहीं दे पाता, अतः यदि चन्द्रमा से द्वितीय और द्वादश भाव में कोई ग्रह नहीं हो,

यदि चन्द्रमा से द्वितीय और द्वादश भाव में कोई ग्रह नहीं हो, तो चन्द्रमा न तो किसी से प्रेरणा ले पाता है और न ही किसी को प्रेरणा दे पाता है। ऐसी स्थिति में चन्द्रमा अकेला पड़ जाता है।

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