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भारत को खुद कहनी होगी अपनी कहानी
Dainik Jagran
|June 05, 2025
आपरेशन सिंदूर की समाप्ति के बाद कुहासे के बादल छट गए हैं। देश-विदेश के तमाम रक्षा विशेषज्ञ और उपग्रहों द्वारा लिए गए चित्रों से पुष्टि हुई कि यह संघर्ष पूरी तरह एकतरफा था और पाकिस्तान को बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी।
इस सैन्य संघर्ष में दुनिया ने भारत के स्वदेश निर्मित सैन्य उपकरणों की बेजोड़ क्षमताओं का लोहा भी माना। राजनीतिक इच्छाशक्ति, सैन्य शौर्य और रक्षा क्षेत्र की उद्यमशीलता ने आशा से अधिक प्रभावित किया है, परंतु इस कठिन समय में जो एक कमी खली, वह थी सूचना क्षेत्र में भारत की ढिलाई। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आपरेशन सिंदूर की बयानगी को लेकर न सिर्फ भारतीय चिंताओं की अनदेखी हुई, बल्कि पाकिस्तानी दावों को बिना जांचे-परखे आगे बढ़ाया गया। न्यूयार्क टाइम्स, सीएनएन, वालस्ट्रीट जर्नल, निक्केई एशिया, ब्लूमबर्ग आदि में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव की ज्यादातर रिपोर्टिंग पाकिस्तानी पत्रकारों द्वारा की गई। समाचार एजेंसी रायटर्स ने तो एक ऐसे गुमनाम पाकिस्तानी लेखक सईद शाह के तीन लेख प्रकाशित किए, जो उस दौरान ही कार्यरत रहा। ये पाकिस्तानी पत्रकार केवल पाकिस्तान का झूठा प्रोपेगंडा ही आगे बढ़ाते रहे। कई पश्चिमी मीडिया माध्यम जाने-अनजाने उनसे प्रभावित भी होते रहे। हालांकि बाद में न्यूयार्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट आदि ने भारतीय दावों की पुष्टि की और इस संघर्ष को भारत की जीत बताया, परंतु युद्ध के दौरान जब मीडिया रिपोर्टिंग देशों के मनोबल और जनमत को प्रभावित करने की क्षमता रखती है, तब पहले चलाए गए झूठे प्रोपेगंडा की बाद में परिशुद्धि संभव नहीं हो पाती।
Diese Geschichte stammt aus der June 05, 2025-Ausgabe von Dainik Jagran.
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