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भास्कर खास एक्सपर्ट कहते हैं... तनाव और चिंता की सही पहचान जरूरी है; लक्षण एक जैसे, पर वजह और असर अलग 'तनाव' और 'चिंता' में फर्क है... तनाव चला जाता है, चिंता ठहर जाती है; जो संभव नहीं उसे स्वीकारें, दूसरों से तुलना न करें... मन को व्यस्त रखें तो 'चिंता चक्र' तोड़ सकेंगे
Dainik Bhaskar Satna
|July 08, 2025
अगर लगातार बेचैनी महसूस कर रहे हैं, नींद पूरी नहीं हो रही और दिमाग में विचार दौड़ रहे हैं, तो यह सिर्फ तनाव नहीं हो सकता। यह एंग्जायटी (चिंता) भी हो सकती है। तनाव और एंग्जायटी के लक्षण कई बार एक जैसे लगते हैं, लेकिन दोनों की वजह और असर अलग होते हैं ...।' पुलित्जर विजेता पत्रकार व लेखिका लॉरेन हिंगिस कहती हैं, 'तनाव जीवन की स्थितियों से आता है जबकि चिंता विचारों से। तनाव अस्थायी हो सकता है, लेकिन चिंता नियंत्रण में न आए तो मानसिक सेहत बिगाड़ सकती है। इसलिए लक्षणों को सही तरह से समझना और उसी के अनुसार समाधान चुनना जरूरी है।' यह कैसे होगा, बता रहे हैं एक्सपर्ट...
अंतर क्या है: फिजिशियन डॉ. शेरोन बर्गक्विस्ट कहती हैं, 'आप पर क्षमता से ज्यादा काम या जिम्मेदारियां आ जाती हैं तो तनाव होता है। इससे चिड़चिड़ापन, गुस्सा या उदासी हो सकती है। दिल की धड़कन तेज होना, या मांसपेशियों में खिंचाव जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। तनाव अक्सर बाहरी वजह से होता है, जैसे काम की डेडलाइन या पारिवारिक समस्या। वजह खत्म हो जाती है, तो तनाव भी कम हो जाता है। जबकि एंग्जायटी बिना स्पष्ट वजह के हो सकती है और लंबे समय तक रह सकती है। तनाव लंबे समय तक रहे और निपट न पाएं, तो एंग्जायटी में बदल सकता है।
Diese Geschichte stammt aus der July 08, 2025-Ausgabe von Dainik Bhaskar Satna.
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