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दीर्घकालिक स्थिरता पर हो जोर

Business Standard - Hindi

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April 30, 2026

वित्त मंत्रालय की आज जारी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट से निपटने के क्रम में अल्पकालिक वृद्धि के पीछे भागने के बजाय, भारत को मध्यम अवधि की राजकोषीय और बाह्य स्थिरता को सुरक्षित रखना चाहिए और लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए।

- असित रंजन मिश्र

दीर्घकालिक स्थिरता पर हो जोर

  • वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अल्पावधि की वृद्धि के बजाय ....

रिपोर्ट में कहा गया है, 'कई देशों के लिए अल्पकालिक वृद्धि को बढ़ावा देना और रोजगार बचाना आकर्षक लग सकता है। मगर वृहद आर्थिक स्थिरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है क्योंकि अल्पकालिक वृद्धि को बहाल करने के सतर्क प्रयास बाहरी संतुलन, मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और मुद्रा को अस्थिर करके मध्यम से लंबी अविध की वृद्धि की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।'

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के नेतृत्व में वित्त मंत्रालय के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में सरकार को संकट से सबक लेते हुए पांच आयामी सुधार रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारत को आयात के लिए किसी एक स्रोत की निर्भरता को दूसरे से बदलने के बजाय ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन को प्राथमिकता देनी चाहिए, साथ ही इसमें ध्यान रखना चाहिए कि अचानक से आपूर्ति पर किसी तरह का असर न पड़े।' रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक जोर देने से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ शहरी जीवन स्तर में सुधार भी हो सकता है। इसमें यह भी कहा गया कि इसके लिए राज्यों के साथ आम सहमति बनाने की जरूरत होगी क्योंकि मौजूदा संकट से निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों की ओर से समन्वित कार्रवाई की जरूरत है।

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट

  • पश्चिम एशिया संकट से महंगाई का जोखिम बढ़ा मगर मजबूत घरेलू मांग से अर्थव्यवस्था को सहारा

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