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आईपीओ बाजार के लिए 2025 दमदार, आगे भी तेजी के आसार
Business Standard - Hindi
|December 25, 2025
भारत का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) बाजार एक नए मुकाम पर पहुंच गया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दो वर्षों (2024-25) में कुछ प्रमुख आईपीओ के माध्यम से लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं। यह रकम 1989 और 2023 के बीच 35 वर्षों में जुटाए गए 6 लाख करोड़ रुपये के आधे से भी अधिक है। आईपीओ का यह कारवां यहीं थमता या कमजोर पड़ता नजर नहीं आ रहा।
कंपनियां करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मसौदा पत्र दाखिल कर चुकी हैं। इनमें अगले साल आने वाले रिलायंस जियो, फ्लिपकार्ट और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आईपीओ शामिल नहीं हैं। इनके अलाव फोनपे, मणिपाल हॉस्पिटल्स और जेप्टो जैसी कंपनियां कुल 1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के निर्गम ला सकती हैं।
निवेश बैंकरों की नजरों में अब 1.5 से 2.0 लाख करोड़ रुपये सालाना रकम जुटाना अब सामान्य हो गया है। आईपीओ बाजार की यह दमदार तेजी बाजार में चली उठापटक, विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली, कमजोर रुपया और यहां तक कि कुछ कमजोर आईपीओ जैसे नकारात्मक बातों पर भारी पड़ी है। फिलहाल तो प्राथमिक बाजार एक अजेय योद्धा की तरह हुंकार भरता नजर आ रहा है।
गोल्डमैन सैक्स के इंडिया फाइनेंसिंग ग्रुप के प्रमुख सुनील खेतान ने कहा, 'हमें लगता है कि विदेशी निवेशक भी 2026 में मजबूत घरेलू संस्थागत निवेश के साथ हो लेंगे जिससे भारत में आईपीओ के तहत बेचे गए शेयरों की तादाद (या मूल्य) पिछले दो वर्षों के रिकॉर्ड स्तर से अधिक हो जाएगी। वित्तीय सेवा, उपभोक्ता और तकनीक क्षेत्रों पर केंद्रित क्षेत्रों में कई अरब डॉलर के आईपीओ आएंगे।'
विश्लेषकों के मुताबिक देश में शेयर बाजार में निवेश के प्रति दिलचस्पी बढ़ने, लोगों की बचत बाजार में आने (सालाना लगभग 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) और भारत की तेज आर्थिक तरक्की में निवेशकों के भरोसे के दम पर देश का आईपीओ बाजार लगातार कुलांचे भर रहा है। विभिन्न क्षेत्रों (नवीकरणीय ऊर्जा, वित्तीय सेवाएं, उपभोक्ता वस्तुएं, औद्योगिक विनिर्माण और तकनीक) की कंपनियों ने इस वर्ष निवेशकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है जिससे आईपीओ सौदों की व्यापकता और गहराई दोनों का पता चलता है।
Diese Geschichte stammt aus der December 25, 2025-Ausgabe von Business Standard - Hindi.
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