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आरबीआई के नए नियम से ऐक्सिस फाइनेंस में पूंजी निवेश आसान
Business Standard - Hindi
|December 18, 2025
ऐक्सिस बैंक के एमडी एवं सीईओ अमिताभ चौधरी ने मनोजित साहा और सुब्रत पांडा से खास बातचीत में बताया कि आरबीआई के नए नियमों से ऐक्सिस बैंक के लिए संभवतः ऐक्सिस फाइनैंस में पूंजी निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
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उन्होंने बताया कि इससे बैंकिंग क्षेत्र में वृद्धि के रुझान, शुद्ध ब्याज मार्जिन, अनुमानित ऋण नुकसान (ईसीएल) आदि पर भी प्रभाव पड़ेगा।
मुख्य अंशः
किसी बैंक समूह की इकाइयों में ओवरलैपिंग (कारोबार के दोहराव) पर आरबीआई द्वारा प्रतिबंध हटाए जाने से ऐक्सिस फाइनैंस में हिस्सेदारी बेचने के आपके निर्णय पर क्या असर पड़ेगा ?
ऐक्सिस फाइनैंस के प्रदर्शन को देखते हुए ऐसा लगता है कि वह वित्त वर्ष 2027 तक ऊपरी स्तर की एनबीएफसी में शामिल हो सकती है। ऐसा होने पर हमें तीन साल के भीतर उसे सूचीबद्ध कराना होगा। कारोबार के स्वरूप पर हालिया प्रपत्र बैंकों को बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के तहत सहायक इकाइयों द्वारा किए गए कारोबार की प्रकृति निर्धारित करने की सुविधा प्रदान करता है। मगर इससे पहले आरबीआई के दिशानिर्देशों के आधार पर हमने स्पष्ट तौर पर कहा था कि हम कोई इक्विटी नहीं डालेंगे और बाहरी स्रोतों से रकम जुटाएंगे। मगर नया प्रपत्र संभवतः हमें पूंजी निवेश करने की अनुमति देता है। इसके लिए हमें आरबीआई से संपर्क करना होगा और मंजूरी लेनी होगी। इस मामले में आंतरिक तौर पर विचार-विमर्श जारी है और हमें अगले कुछ महीनों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
अगर आप हिस्सेदारी बेचना चाहेंगे तो वह कितनी होगी?
हिस्सेदारी बेचने की योजना महज इच्छा से नहीं बल्कि अगले कुछ वर्षों के लिए ऐक्सिस फाइनैंस की वित्तीय जरूरतों से प्रेरित थी। हमारा उद्देश्य ऐक्सिस फाइनैंस के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाना था। हमने अनुमान लगाया था कि कंपनी को 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसलिए इतनी रकम जुटाने के लिए मूल्यांकन के लिहाज से जो भी हिस्सेदारी बेचने की जरूरत थी, उसके लिए हम आगे बढ़ सकते थे।
हालिया दर में कटौती के कारण आपके मार्जिन पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
Diese Geschichte stammt aus der December 18, 2025-Ausgabe von Business Standard - Hindi.
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