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ऐसे रोकें भगदड़

India Today Hindi

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June 25, 2025

बार-बार होने वाली भगदड़ के हादसे भारत के भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक इलाकों में योजना, पुलिस व्यवस्था और तैयारी की बड़ी खामियों को उजागर कर रहे

- अभिनव कुमार

ऐसे रोकें भगदड़

करीब तीन दशक की अपनी पुलिस सेवा में यह बात अच्छी तरह समझ में आ गई है कि कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा का दारोमदार बीते अनुभवों पर है और लगातार नवाचार पर भी. भारत जैसे विविधताओं से भरे और उत्सवों से जीवंत देश में भगदड़ की घटनाएं बार-बार सामने आती हैं, जो हमारी लगातार सतर्कता और सक्रिय उपायों की मांग करती हैं.

पिछले पांच साल में देश के अलग-अलग हिस्सों से भगदड़ की दो दर्जन से ज्यादा घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं. ये ज्यादातर धार्मिक त्योहारों और बड़ी जनसभाओं के दौरान होती हैं. हरेक हादसा-चाहे वह सांस्कृतिक उत्सव के दौरान हुआ हो या किसी अचानक उमड़ी भीड़ के चलते-भीड़ प्रबंधन की रणनीतियों और सरकारी तंत्र की कमजोरियों की गंभीर याद दिलाता है. यह साफ है कि हमें भीड़ को नियंत्रित करने का अपना तरीका बदलना होगा, और पुलिस व्यवस्था के हर स्तर पर नेतृत्व को भी बदलते हालात के मुताबिक ढलना होगा-खासतौर से तब, जब बेंगलूरू में 4 जून को हुई भगदड़ जैसी घटनाएं हमें यह बताती हैं कि नाकाफी योजना और प्रतिक्रिया की कितनी बड़ी मानवीय कीमत चुकानी पड़ती है.

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