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सपनों को किससे सींचें ?
Aha Zindagi
|August 2025
कभी-कभी सबसे गहरी बातें वही होती हैं, जिन्हें ज़ोर से नहीं कहा जाता, बस महसूस किया जाता है। चीनी दार्शनिक लाओ त्सु ने भी 'ताओ ते चिंग' नामक पुस्तक के माध्यम से जीवन के ऐसे ही सूत्र बताए हैं।
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वह न तो किसी राजदरबार के उपदेशक थे, न ही किसी युद्ध के नायक, फिर भी उनके विचार कई पीढ़ियों को दिशा दे चुके हैं।
लाओ त्सु एक प्राचीन चीनी दार्शनिक थे, जो रहस्य और किंवदंतियों से घिरे रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि वे दार्शनिक होने के साथ-साथ सलाहकार और शिक्षक थे और उनकी मुख्य मान्यताएं सादगी, विनम्रता और प्राकृतिक जीवनशैली के साथ सामंजस्य पर ज़ोर देती हैं। उन्हें ताओवाद नामक दार्शनिक प्रणाली की स्थापना का श्रेय दिया जाता है और उनकी शिक्षाओं को दुनियाभर में कई संस्कृतियों और धर्मों द्वारा अपनाया गया है। उनकी शिक्षा यह नहीं बताती कि क्या करना है और यह समझने का अवसर देती है कि कभी-कभी कुछ न करना भी एक महान योगदान बन सकता है। ताओ की राह पर चलना, स्वयं को खोकर स्वयं को पाने जैसा है।
सभी के साथ अच्छा व्यवहार करो...अगर आप दिशा नहीं बदलते तो आप वहां पहुंच ही जाएंगे जो आपकी मंज़िल है।
महान कार्य छोटे-छोटे कार्यों से बने होते हैं।
Diese Geschichte stammt aus der August 2025-Ausgabe von Aha Zindagi.
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