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जैसा ध्यान करते हैं, वैसा ही बनते हैं
Sadhana Path
|June 2024
ध्यान करने का प्रयोजन यही है कि हम अपनी वर्तमान जीवन-विधि और मनोदशा में सृजनात्मक प्रगति लाकर उसे एक नये व्यापक क्षेत्र में ले चलें। अपने जीवन को परम-तत्त्व के साथ एक तान या तन्मय बनाना ही ध्यान है, किन्तु तुम्हें प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।
नियमित अभ्यास और दृढ़ निष्ठा ही सफलता का रहस्य है। ध्यान में प्रगति कभी भी अपनी योजना के अनुसार प्राप्त नहीं होती। हड़बड़ी करने से कोई फल हाथ नहीं आयेगा, तुम्हें केवल निराश होना पड़ेगा। धीरे से आगे बढ़ो, क्रमशः उसमें गति आने दो और ध्यान को अपनी गति के अनुसार आगे बढ़ने दो। याद रखो कि तुम प्राप्तकर्ता हो, इसलिए फल प्राप्ति की प्रतीक्षा करना सीखो।
कितने लाख वर्षों तक पशु-जीवन में संघर्ष करने के बाद तुम्हें मनुष्य जीवन मिला होगा। अब हमें तर्क- बुद्धि और मन प्राप्त हुआ है। इसके द्वारा हम कुछ सीमा तक शीघ्र विकास करने की स्वतंत्रता प्राप्त कर सके हैं। इसका यह अर्थ नहीं कि तुम उस परमात्मा के शान्त भवन में शोर करते हुए घुस जाओगे। पहले अपने अन्दर अपने बौद्धिक अहंकार को धीरे-धीरे नष्ट होने दो। हमें पूर्ण नम्रता के साथ समर्पण करने की कला सीखनी चाहिए।
Diese Geschichte stammt aus der June 2024-Ausgabe von Sadhana Path.
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