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दादाजी के जोरदार खर्राटे
Champak - Hindi
|January First 2025
मीशा और उस की छोटी बहन ईशा सर्दियों की छुट्टी में अपने दादादादी से मिलने गए थे. उन्होंने दादी को बगीचे में टमाटरों को देखभाल करते हुए देखा. उन के साथ उन की बूढ़ी बिल्ली की भी थी. टमाटरों के पौधों को तैयार करना था ताकि वे अगली गर्मियों में खिलें और फल दें.
"आप का बगीचा बहुत सुंदर है," ईशा ने मौसम के आखिरी पके टमाटरों की प्रशंसा करते हुए कहा.
"मैं ने सेब का बीज उगाने की कोशिश की थी, लेकिन वह कुछ समय बाद सूख गया,” मीशा ने टमाटर तोड़ कर अपनी टोकरी में रखते हुए कहा. "हालांकि मुझे यकीन है कि मैं ने एक अंकुर देखा था."
“क्या तुम ने पौधों की देखभाल की?" दादी ने टमाटर के पौधों के चारों ओर लकड़ी के टुकड़े लगाते हुए पूछा. “पौधे प्यार महसूस करते हैं और वे दयालुता के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं."
"यही कारण है कि आप के बगीचे में टमाटर इतने सुंदर, लाल और गोल हैं," ईशा और मीशा ने एकसाथ कहा.
"मुझे लगता है कि ऐसा ही है," दादीमां ने अपनी गरदन के चारों ओर ऊनी दुपट्टा ठीक कर हंसते हुए कहा. उन्हें अपना बगीचा बहुत पसंद था. वे बगीचे में चाय की चुस्की लेते हुए अपने पौधों से बातें करती थीं. गरमी के मौसम में गौरैया कुकी के टुकड़ों के लिए उन के चारों ओर उलछती रहती थी.
ठीक उसी समय डौली बतख टर्राती हुई आई. उसके पीछे उस के बच्चे भी थे. वे सभी 8 बच्चे एक पंक्ति में तालाब की ओर बढ़े. डौली बतख ने शेड के बगल में लाल ठेले के पास एक प्यारा सा घोंसला बनाया जो जैस्पर और चमेली की झाड़ियों से छिपा हुआ था, और सुरक्षित थी. उन्होंने अपनी बतखों को ठंड के दिनों में गरम रखने के लिए उस पर मुलायम घास और काई बिछा रखी थी.
"क्या हम बतखों को खाना नहीं खिलाएंगे, दादी?" ईशा ने पूछा..
"हां, ईशा. दादाजी अलमारी ठीक कर लें फिर देंगे," दादी मुसकराईं, “तुम दोनों ऊपर जा कर उन का हालचाल क्यों नहीं पूछ लेते हो?"
ईशा और मीशा दादाजी को देखने के लिए ऊपर की ओर भागीं. उन्होंने देखा, दादाजी अपनी आरामदायक कुरसी पर एक मुलायम रजाई में लिपटे हुए सो रहे थे और उन की गोद में एक पत्रिका पड़ी थी. उन का मुंह खुला हुआ था और वे जोरजोर से खर्राटे ले रहे थे."अरे, अगर दादाजी के मुंह में मक्खी चली गई तो क्या होगा?” ईशा फुसफुसाई.
Diese Geschichte stammt aus der January First 2025-Ausgabe von Champak - Hindi.
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