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कपास फसल के लिए पोषक प्रबंधन की उन्नत तकनीकें

Modern Kheti - Hindi

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15th July 2025

कपास, जिसे 'सफेद सोना' भी कहा जाता है, भारतीय कृषि व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह न केवल कपड़ा उद्योग की रीढ़ है, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका का भी प्रमुख स्रोत है।

- 1 पवन कुमार, 2 अमित कुमार और 3 प्रीति मालिक 1×3 कृषि विज्ञान केंद्र, जींद, 2 कृषि विज्ञान केंद्र, कैथल चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

कपास फसल के लिए पोषक प्रबंधन की उन्नत तकनीकें

भारत विश्व के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल है और इसकी फसल देश के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश। कपास की खेती का हमारे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और निर्यात व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान है। कपास की अधिक पैदावार लेने के लिए उन्नत किस्मों को सही समय पर बोने, उपयुक्त खाद देने व समय पर पौध सरंक्षण उपाय अपनाने की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए ।

खाद (Fertilizer) : कपास पर नाइट्रोजन वाली खादों का अच्छा असर पड़ता है लेकिन कुछ क्षेत्रों में फास्फोरस की खाद के नतीजे भी अच्छे दिखाई दिए हैं। अब तक किए गए प्रयोगों के आधार पर कपास की अच्छी पैदावार के लिए खाद की निम्नलिखित मात्रा की सिफारिश की जाती है :

imageबेहतर होगा कि सारा फास्फोरस व जिंक सल्फेट बिजाई के समय डालें। अगर नहीं डाला गया हो तो डोडी बनते समय नाली द्वारा दें। नाइट्रोजन वाली खाद की आधी मात्रा बौकी आने (जुलाई-अन्त) के समय तथा आधी फूल आने के समय डालें। यदि कपास, गेहूं के बाद बोई गई है या कम उपजाऊ जमीन में बोई गई है तो नाइट्रोजन वाली खाद की पहली आधी मात्रा पौधों को विरला करते समय देने की बजाये बिजाई पर दें। यूरिया खाद को एकसार बिखेरने के लिए हस्तचालित खाद बिखेरने वाली मशीन का प्रयोग कर सकते हैं। संकर व बी. टी. किस्मों के लिए नत्रजन खाद तीन बराबर हिस्सों में बांट कर तीन बार डालें - बिजाई के समय, बौकी आने पर तथा फूल आने पर

बी.टी. कपास की अधिक पैदावार लेने के लिए 80 कि.ग्रा. जिप्सम (12 कि.ग्रा. गंधक) प्रति एकड़ की दर से बिजाई से पहले की जुताई के समय डालें।

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