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शनि जनित विषयोग

Jyotish Sagar

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May 2021

जब भी किसी जातक की कुण्डली में शनि और चन्द्रमा तथा शनि और सूर्य एक साथ विराजमान हो, तो ये विषयोग की उत्पत्ति करते हैं, जिसके कारण अनेक कष्टों का कारण जातक के जीवन में बन जाता है। आयु, मृत्यु, भय, दुःख, अपमान, रोग, दरिद्रता, दासता, बदनामी, विपत्ति, निन्दित कार्य, नीच लोगों से सहायता, आलस्य, कर्ज, लोहा, कृषि, उपकरण तथा बंधन का विचार शनि ग्रह से होता है।

- ओमप्रकाश दार्शनिक

शनि जनित विषयोग

अपने अशुभ कारकतत्व के कारण शनि ग्रह को पापी तथा अशुभग्रह कहा जाता है, परन्तु यह पूर्णतः सत्य नहीं है। वृषभ, तुला, मकर और कुम्भ लग्न वाले जातक के लिए शनि ऐश्वर्यप्रद होता है।

विषयोग की स्थिति :

1. कुण्डली में विषयोग का निर्माण शनि और चन्द्र की जब युति होती है अथवा शनि-सूर्य के आधार पर बनता है।

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