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निशाने पे आंदोलन समर्थक
Loksangharsh Patrika
|October 2020
मुसलमानों के अहम त्यौहार बकरीद (कुर्बानी) का महीना शुरू हुआ ही है के भारत में खास धार्मिक विचारधारा के लोग, एनजीओ, पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से कोरोना की आड़ लेकर उनके मजहबी आजादी पर नकेल कसने जमीन पर फैल गए हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में ही बकरीद में कुर्बानी न करने को लेकर 'पेटा' संगठन के बड़े बड़े होर्डिंग्स नजर आने लगे जिन्हें तीखे जनदबाव के चलते हटवा दिया गया। वैसे पिछले दो दशकों से धर्म विशेष की राजनैतिक पार्टी के गुंडे दबंगई करते हुए गांव, देहात के घरों से मुसलमानों के इस त्यौहार के लिए खरीदे गए बकरों व अन्य जानवरों को कुर्बानी के पहले खोलकर ले
Diese Geschichte stammt aus der October 2020-Ausgabe von Loksangharsh Patrika.
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निशाने पे आंदोलन समर्थक
मुसलमानों के अहम त्यौहार बकरीद (कुर्बानी) का महीना शुरू हुआ ही है के भारत में खास धार्मिक विचारधारा के लोग, एनजीओ, पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से कोरोना की आड़ लेकर उनके मजहबी आजादी पर नकेल कसने जमीन पर फैल गए हैं।
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October 2020
Loksangharsh Patrika
राष्ट्र के लिए घातक है संविधान में बदलाव
हमें आज हमारे संविधान और हमारे देश को वर्तमान सरकार से बचाने की जरूरत है। आजादी के बाद से इसके पहले कभी भी ऐसी आवश्यकता नहीं हुई, और न ही लोगों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जहाँ कानून का शासन नहीं बल्कि कानून रहित शासन इस भूमि पर चल रहा है।
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October 2020
Loksangharsh Patrika
सीएए, एनआरसी के कारण मूल निवासियों का अस्तित्व खतरे में
फरवरी 2019 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश जारी किया जिसके अनुसार भारत के वन क्षेत्र में रह रहे 21 लाख आदिवासी जो यह साबित नहीं कर पाए कि वे 2005 से पहले से इन वनों में रह रहे हैं, उन्हें जंगलों से खदेड़ दिया जाएगा।
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October 2020
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