Fiction
Samay Patrika
कशीर
भारत के बुद्धिजीवियों में यह धारणा बनी हुई है कि भारत और पाकिस्तान के बीच की अनबन के लिए कश्मीर की समस्या ही मूल कारण बनी है।
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November 2020
Samay Patrika
फर्श से अर्श तक पहुँचने की प्रेरक कहानी
ओपरा विनफ्रे ने अपनी दुनिया ख़ुद बनाई है. उन्होंने महिला शक्ति को एक नई पहचान दी है. उनका सफ़र प्रेरणा से भरा है, जहाँ उन्हें सफलता के शिखर तक पहुँचने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा
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November 2020
Samay Patrika
महान् बनने का विज्ञान
प्रत्येक व्यक्ति के अंदर शक्ति का एक सिद्धांत होता है। इस सिद्धांत के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग एवं मार्गदर्शन के द्वारा मनुष्य स्वयं अपनी आंतरिक शक्ति का विकास कर सकता है। मनुष्य में एक अंतर्निहित शक्ति होती है, जिसकी सहायता से वह जिस दिशा में चाहे, प्रगति कर सकता है और उसकी प्रगति की संभावनाओं की कोई सीमा भी दिखाई नहीं देती। अभी तक कोई मनुष्य किसी एक क्षेत्र में इतना महान् नहीं बन पाया है कि किसी और के उससे अधिक महान् बनने की संभावना न हो। यह संभावना उस मूल तत्त्व में है, जिससे मनुष्य बना हुआ है। प्रतिभा वह सर्वज्ञता है, जो मनुष्य के अंदर प्रवाहित होती रहती है।
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October 2020
Samay Patrika
चित्रकार और शिल्पकार पिकासो
पिकासो को उनके चित्रों की रेखाएँ ही दर्शकों से संवाद स्थापित करती हैं, इसलिए उन्हें प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा तो वास्तव में चित्रकार के रूप में मिली; क्योंकि उनकी पेंटिंग का हर कोना अपनी कहानी खुद कहता है
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October 2020
Samay Patrika
कोरोना से बचने के आध्यात्मिक सिद्धांत
कोरोना की जंग है बचना है, बचाना है तभी जीत हासिल होगी... कभी-कभी कोई ऐसी महामारी दुनिया में पैर पसार लेती है, जिससे लाखों लोगों की जान चली जाती है। इस पीढ़ी के लिए यह घटना अभूतपूर्व है।
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October 2020
Samay Patrika
कारगिल शहीदों की प्रेरक कहानियाँ
कारगिल किसी ऐसे युद्ध का लेखाजोखा मात्र नहीं है, जिसे भारतीयों ने अपनी बैठकों में टेलीविजन के जरिए देखा. यह हमें उस बलिदान, प्रेम और यादों की कहानियों से भी परे ले जाता है, जिन्हें शहीदों के परिवारवालों, दोस्तों और रेजीमेंट्स ने पिछले बीस वर्षों से जीवित रखा हुआ है.
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October 2020
Samay Patrika
दस क्लासिक हिंदी फ़िल्मों के निमणि की असाधारण यात्रा
भारतीय फ़िल्मों के इतिहास में क्लासिक हिंदी फ़िल्मों का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण है। इन फ़िल्मों को बने कई दशक बीत चुके हैं, पर आज भी उनका जादू क़ायम है या यूँ कहिए कि उनका महत्त्व और लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।
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September 2020
Samay Patrika
बोलना ही है लोकतंत्र, संस्कृति और राष्ट्र के बारे में
मेरा बोलना और उसे साहस के फ्रेम में देखा जाना ये सब 2014 के बाद की परिस्थितियों की मेहरबानी है। 2014 के बाद राजनीति की हवा बदल गई। सरकार की आलोचना को देश की आलोचना बताया जाने लगा।
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September 2020
Samay Patrika
मुग़ल-ए-आज़म के पीछे की दिलचस्प कहानी
दास्तान-ए-मुग़ल-ए-आज़म
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September 2020
Samay Patrika
शिखंडी अंबा के प्रतिशोध की गाथा
काशी नरेश द्वारा आयोजित अपनी तीन बेटियों के स्वयंवर-स्थल में से उनका हरण करने पर उनकी सबसे बड़ी बेटी अंबा अपने हरणकर्ता भीष्म के विरुद्ध परशुराम से युद्ध का कारण बनी।
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September 2020
Samay Patrika
हम भारतीय कौन हैं? हम कहाँ से आए थे?
पत्रकार टोनी जोसेफ़ 65,000 वर्ष अतीत में जाते हैं, जब आधुनिक मानवों या होमो सेपियन्स के एक समूह ने सबसे पहले अफ्रीका से भारतीय उपमहाद्धीप तक का सफ़र तय किया था।
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August 2020
Samay Patrika
हाशिमपुरा 22 मई
आज़ाद भारत के सबसे बड़े हिरासती हत्याकांड का पर्दाफाश
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August 2020
Samay Patrika
सफलता वही है, जो आपके भीतर खुशी के इंडेक्स को बढ़ाए
निशांत जैन की प्रेरणादायक किताबें हर आयु वर्ग के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी किताब 'रुक जाना नहीं' रिलीज़ होते ही बेस्टसेलर किताबों में शामिल हो गई और आज भी खूब बिक रही है। समय पत्रिका ने ख़ास बातचीत की लेखक निशांत जैन से.
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August 2020
Samay Patrika
महिलाओं के सशक्तिकरण से दुनिया बदलतीं मेलिंडा गेट्स
जब महिलाएं दुर्व्यवहार में फंस जाती हैं और अन्य स्त्रियों से अलग हो जाती हैं, हम हिंसा के खिलाफ खड़ी नहीं हो सकतीं, क्योंकि तब हमारे पास आवाज़ नहीं होती। लेकिन जब स्त्रियां एक-दूसरे के साथ इकट्ठा होती हैं, एक-दूसरे को शामिल करती हैं, अपनी कहानियों को एक-दूसरे को बताती हैं, अपने दुख को साझा करती हैं, हम अपनी आवाज़ को एक-दूसरे में पाती हैं। हम एक नई संस्कृति बनाती हैं - वह नहीं जो हम पर थोपी गई है, बल्कि वह जो हम अपनी आवाज़ और अपने मूल्यों के साथ बनाती हैं।
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August 2020
Samay Patrika
पॉलिटिक्स पर लिखना आसान नहीं होता ब्रजेश राजपूत
ब्रजेश राजपूत टीवी के सीनियर पत्रकार हैं और रिपोर्टिंग के साथ साथ लगातार लेखन कर रहे हैं उनकी हाल में आयी किताब 'वो सत्रह दिन' बेहद चर्चित हो रही है. मध्यप्रदेश के कमलनाथ सरकार गिराने के घटनाक्रम पर लिखी इस किताब को पॉलिटिकल थ्रिलर कहा जा रहा है. भोपाल में रहने वाले ब्रजेश राजपूत से बात की समय पत्रिका ने उनकी नयी किताब और आने वाली किताब के बारे में.
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August 2020
Samay Patrika
गीता प्रेस और हिन्दू भारत का निर्माण
गीता प्रेस और इसके प्रकाशन द्वारा तैयार किये जा रहे विचारों ने हिंद राजनैतिक चेतना और वास्तव में हिंदी जन दायरे को गढ़ने में अहम भूमिका निभाई। यह इतिहास हमें हिंदू दक्षिणपंथ की राजनैतिक सर्वश्रेष्ठता के उभार जैसे विवादित और जटिल विषय पर नई दृष्टि प्रदान करता है...
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August 2020
Samay Patrika
कश्मीर और कश्मीरी पंडित
बसने और बिखरने के 1500 साल
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July 2020
Samay Patrika
मुम्बई अंडरवर्ल्ड के कुख्यात गिरोहबाज़
बायकला टू बैंकॉक मेरी पिछली पुस्तक डोंगरी से दुबई तक के सिलसिले को पूरा करती है, जिसमें पिछले छह दशकों के मुम्बई माफिया और इस शहर के साथ उसके संबंध को बयान किया गया है।
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July 2020
Samay Patrika
रहस्य और रोमांच से भरा उपन्यास है 'आह्वान'
यह यात्रा बेहद रोमांचक लगती है। पाठक इसकी सैर बार-बार करने की सोच सकते हैं
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July 2020
Samay Patrika
राजनीति और भ्रष्टाचार का गठजोड़
विक्रम सिंह आज के चर्चित युवा कहानीकारों में से एक हैं। उन्होंने समकालीन विषयों पर बहुत ही बेहतरीन कहानियां लिखी हैं। कहानियां अपने विषय -वस्तु के हिसाब महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह उनका यह पहला उपन्यास यारबाज नाम से आया है। दरअसल यारबाज उन्हीं की एक महत्वपूर्ण कहानी 'गणित का पंडित' का विस्तार है।
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July 2020
Samay Patrika
सीक्रेट ने कैसे बदला मेरा जीवन
जब से द सीक्रेट फ़िल्म और पुस्तक संसार के सामने आई है, तब से लाखों लोग हमें बता चुके हैं कि उन्होंने द सीक्रेट के सिद्धांतों का इस्तेमाल करके अपनी मनचाही चीज़ कैसे आकर्षित की: उन्होंने आदर्श स्वास्थ्य, दौलत, आदर्श जीवनसाथी, आदर्श करियर कैसे पाया, वैवाहिक जीवन या प्रेम संबंध को बेहतर कैसे बनाया, किसी खोई हुई चीज़ को दोबारा कैसे पाया, यहाँ तक कि अपने दुख कैसे दूर किए और ख़ुशी कैसे पाई।
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July 2020
Samay Patrika
अपने चाणक्य स्वयं बनें
न्यूटन ने कहा था कि प्रकृति की किताब गणित की भाषा में लिखी गई है।
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June 2020
Samay Patrika
ममता से मातृत्व तक की यात्रा
यह कोई परंपरागत रूप में स्वालंबी बनने से जुड़ी पुस्तक नहीं है। यह माँ के रूप में मेरी यात्रा का ईमानदार व गंभीर वर्णन है
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June 2020
Samay Patrika
शोमैन राजकपूर
राज कपूर ने न केवल फिल्में बनाई, अपितु उन्होंने भारतीय फिल्म दर्शन की मुख्यधारा का उस समय निर्माण किया, 'बॉलीवुड' नाम के शब्द की एक झलक मात्र ही फिल्म विपणनकर्ताओं की आँखों में दिखाई पड़ी थी
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June 2020
Samay Patrika
एक दिलचस्प दास्तान
कुछ कहानियां लंबे समय तक याद रखी जा सकती हैं, राहुल चावला की 'हज़ारों ख्वाहिशें' ऐसी ही किताब है. कहानी जटिलता से परे चलती है, लेकिन परत के भीतर परत होने से रोचकता और जिज्ञासा बढ़ती है.
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May 2020
Samay Patrika
चुनौतीपूर्ण पत्रकारिता की सच्ची घटनायें
'ख़बर अच्छी हो या बुरी, सच यही है कि पत्रकारों के फेफड़ों की दरारें एक ही अनुपात में दरकती हैं। मौत और मातम ख़बरों में ऐसे ही बिकता है। ख़बरों के रीति-रिवाज ऐसे ही हैं। सूरज उगने-ढलने तक घटनायें-दुर्घटनायें होती रहेंगी। दहशतभरी ख़बरें आती रहेंगी। खौफनाक और डरावने सच सामने आते रहेंगे। ख़बरों का यह संसार भले ही हर दिन आपकी ऊर्जा को निचोड़ लेता है, लेकिन कई ऐसे अनुभव भी इसका हिस्सा हैं जो संजीवनी की तरह आपकी चेतना में प्राण फूंक देते हैं और होठों पर मुस्कुराहट ले आते हैं
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May 2020
Samay Patrika
क्या शूर्पणखा लंका के विनाश का कारण थी?
शूर्पणखा का अर्थ है, एक ऐसी स्त्री जो नाखून की तरह कठोर हो। उसके जन्म का नाम मीनाक्षी था, अर्थात् मछली जैसी सुंदर आंखों वाली। शूर्पणखा, रामायण की ऐसी पात्र है जिसे सदा गलत समझा गया है। वह उन भाइयों की छत्र-छाया में बड़ी हुई, जिनकी नियति में युद्ध लड़ना, जीतना तथा ख्याति व प्रतिष्ठा अर्जित करना लिखा था। परंतु इस सबके विपरीत शूर्पणखा के जीवन का मार्ग पीड़ा और प्रतिशोध से भरा था.
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May 2020
Samay Patrika
नए ज़माने की रोचक कहानी
जयंती रंगनाथन की पुस्तक 'एफ.ओ. ज़िन्दगी' ऐसी कहानी कहती है जिसमें भागती-दौड़ती युवाओं की बातें, उनके जीवन में बनते-बिगड़ते रिश्ते, उधेड़बुन, भ्रम, आशा-निराशा आदि मौजूद हैं। यह ऐसी किताब है जिसे पढ़कर रोमांच, मुस्कान, मायूसी, हैरानी होती है। शुरु से ही पाठक कहानी में रम जाता है। कारण है उसका फास्ट-पेस होना।
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May 2020
Samay Patrika
योग और आहार से 100 साल कैसे जिएँ
योग ने मुझे ऐसे रोगों से मुक्ति दिलाई थी, जिन्होंने चिकित्सा विज्ञान के अन्य लोकप्रिय रोगोपचारों के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई थी। मैं उसकी नियमित रूप से साधना करती रही, उसके विषय में पढ़ती एवं बातचीत करती और कुछ समय में योग की चिकित्सक बन गई।
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May 2020
Samay Patrika
साधो ये उत्सव का गाँव - बनारस के ठलुओं की अड़ी और काशी की दिलचस्प यात्रा
काशी की यात्रा का अर्थ है, काशी को समझना, बूझना, थोड़ा गहरे उतरना और इसके परिचय के महासागर में अपने स्व के निर्झर का विसर्जन कर देना। सो कुछ बनारसी ठलुओं ने एक दिन अपनी अड़ी पर यही तय किया। व्यक्ति, समाज, धर्म, संस्कृति और काशी के अबूझ रहस्यों को जानने के लिए क्यों न पंचक्रोशी यात्रा की जाए? पंचक्रोशी यानी काशी की पौराणिक सीमा की परिक्रमा। सो ठलुओं ने परिधि से केंद्र की यह यात्रा शुरू कर दी। यात्रा अनूठी रही। इस यात्रा में हमने खुद को ढूँढ़ा। जगत को समझा। काशी की महान विरासत को श्रद्धा और आश्चर्य की नजरों से देखा। अंतर्मन से समृद्ध हुए। जीवन को समृद्ध किया। दिनोदिन व्यक्तिपरक होती जा रही इस दुनिया में सामूहिकता के स्वर्ग तलाशे। कुछ विकल्प सोचे। कुछ संकल्प लिये। खंडहर होते अतीत के स्मारकों के नवनिर्माण की मुहिम छेड़ी। यात्रा के प्राप्य ने हमारी चेतना की जमीन उर्वर कर दी। जब यात्रा पूरी हुई तो ठलुओं ने तय किया कि क्यों न इस यात्रा के अनुभव और वृत्तांत को मनुष्यता के हवाले कर दिया जाए! फिर आनन-फानन में इस पुस्तक की योजना बनी। यात्रा के दौरान दिमाग के पन्नों पर जो अनुभूतियाँ दर्ज हुई, ठलुओं ने उन्हें इतिहास के सरकंडे से वर्तमान के कागज पर उतारा और यह किताब बन गई....
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