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Aaj Samaaj - April 04, 2026

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Aaj Samaaj Description:

Aaj Samaaj is the fastest-growing Hindi daily in North India with over 25 lakh readers. A Hindi daily that reflects iTV network’s innovative content, reader focus and engaging format, Aaj Samaaj covers news, views, updates, analyses and trends that make it an extremely popular brand among consumers in North India.

In dieser Ausgabe

April 04, 2026

तेल के खेल में सत्ता का नया केंद्र बनेगा भारत

हम भारी मात्रा में तेल और गैस के उत्पादन और बिक्री में बहुत अच्छा तालमेल बिठा रहे हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद पृथ्वी पर दूसरा सबसे बड़ा भंडार अब हम कच्चे तेल के लिए मध्य पूर्व पर पूरी तरह से निर्भर नहीं हैं और फिर भी हम वहां सहायता के लिए मौजूद हैं। हालांकि, ट्रंप भले ही वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा कर लिया हो लेकिन इसमें सबसे अधिक फायदा भारत को हो सकता है। भारत इसमें सत्ता का केंद्र बन सकता है ? यानी भारत तेल के खेल में विश्व उर्जा का केंद्र बन सकता है क्योंकि भारत भले ही दूसरे देशों से कच्चे तेलों का निर्यात करता हो लेकिन कच्चे तेल की रिफाइनिंग के लिए अन्य देशों को हम भारत पर ही निर्भर रहना पड़ता है, क्योंकि रिफाइनरी के मामले में भारत दुनिया के सभी देशों से आगे हैं। अगर अमेरिका वेनेजुएला के कच्चे तेल को यूरोपियन देश को बेचता है तो इसमें भी भारत का ही सबसे फायदा है। क्योंकि, यूरोपियन देश भारत से सबसे अधिक रिफाइंड तेल खरीदते हैं। अमेरिका खुद भारत से सबसे अधिक रिफाइंड तेल का निर्यात करता है।

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जलवायु परिवर्तन : खतरे में पान की पारंपरिक खेती

कभी यहां पान की बेलें सिर्फ खेतों में नहीं, लोगों की जिंदगी में भी लहलहाती थीं। आज वही बेलें सिकुड़ गई हैं और उनके साथ सिकुड़ गई है एक पूरे समुदाय की आर्थिक और सामाजिक दुनिया । एक आज ये गांव खाली हो रहे हैं। वहां के ग्रामीण कामकाज के लिए बड़े शहरों में पलायन कर गए हैं। खाली पड़े मकान गांवों को भुतहा सा दशार्ते हैं। पिछले दिनों मैंने जब इस इलाके के बारे में सुना था तो एक बात बार-बार मन में आ रही थी कि क्या सचमुच यह सिर्फ मौसम की मार है? या फिर हम अपनी जिम्मेदारियों को 'जलवायु परिवर्तन' जैसे बड़े शब्दों के पीछे छिपा रहे हैं? यह सच है कि मौसम बदल गया है। सर्दियां पहले जैसी नहीं रही हैं, गर्मियां झुलसा देती हैं और बारिश अपने समय पर नहीं आती। पान जैसी नाजुक फसल के लिए यह बदलाव जानलेवा साबित हुआ है। मैं जब इस इलाके में गया तो गांवों की समृद्ध अर्थ व्यवस्था को उजड़े हुए पाया। खरैरी, बागरैन और खानखेड़ा गांवों के किसान बताते हैं कि पहले पान की एक बेल पंद्रह फीट तक जाती थी, अब सात-आठ फीट पर ही दम तोड़ देती है।

जलवायु परिवर्तन : खतरे में पान की पारंपरिक खेती30

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