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शाकाहारी भोजन व योगाभ्यास की शक्ति
Rishi Prasad Hindi
|April 2025
राममूर्ति नाम के एक पहलवान हो गये।
वे बचपन से ही शाकाहारी और ब्रह्मचारी थे। उस समय यूरोप में युजेन सैंडो नाम का पहलवान था। उसे अपनी ताकत पर घमंड था। वह यूरोप में चुनौती देता था कि 'है कोई जो मेरे से कुश्ती करे !'
जब वह भारत आया तो पहलवान राममूर्ति ने उसको ललकारा : “मुझसे कुश्ती करो !'
सैंडो ने सोचा कि 'मैं तो इतने अंडे, इतना मांस खाता हूँ, यह करता हूँ... तो भी मेरे में ५० मन (१८५० किलो) वजन उठाने की ताकत है और यह १५० मन (५५५० किलो) वजन उठा लेता है।'
तो उसने बहाना बनाया : “मैं हिन्दुस्तानियों से नहीं लडूंगा ।"
फिर राममूर्ति बाल गंगाधर तिलक से मिले। उन्होंने कहा : “वह बहाना बना के भागता है तो तुम अपना सर्कस खोलो और लोगों को बताओ कि अंडा-मांस खाये बिना भी व्यक्ति स्वस्थ और मजबूत हो सकता है। अपने में बल है। वह बल प्राणबल से और खुराक पचाकर पुष्ट होने से जागृत होता है।"
वैज्ञानिकों ने अभी यह सिद्ध किया कि 'अंडा खाने से उतना फायदा नहीं होता जितना दूध, फल, दालें, मेवे, हरी सब्जियों से होता है। एक आँवला अथवा नारंगी के १०० ग्राम रस से जितना विटामिन 'सी' मिलता है - पूज्य बापूजी उतना विटामिन 'सी' २०० अंडे खायें तब भी नहीं मिलता है।' आँवले, नारंगी में विटामिन 'सी' खूब है। केले में कैलोरी है; चने, मूँग, मटर में प्रोटीन आदि तत्त्व बहुत हैं फिर खामखाह लोग मुर्गी के अंडे और बच्चे खा के मुर्गी जैसे मन के हो जाते हैं।
Denne historie er fra April 2025-udgaven af Rishi Prasad Hindi.
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