Prøv GOLD - Gratis
भारत में सूर्योपासना एक विवेचना
Jyotish Sagar
|January 2024
वेद कहते हैं 'सूर्य आत्मा जगत: तस्थुषश्च' अर्थात् सूर्य समस्त चराचर जगत् की आत्मा हैतथा ‘असवादित्योब्रह्मः' अर्थात् सम्मुख आदित्य (सूर्य) 'ब्रह्म' है। वेदों में यद्यपि सूर्य की प्रधान देवों में गणना नहीं है, फिर भी वैदिक काल में सूर्यपूजा की विद्यमानता दृष्टिगोचर होती है। सविता (सूर्य) की उपासना में गायत्री मन्त्र सर्वविदित है। आज भी नित्य सन्ध्या वन्दन में गायत्री मन्त्र का जप किया जाता है। वेदों के अनुसार भगवान् सूर्य के रथ के सात घोड़े हैं, जो ज्योतिष की दृष्टि से 'वार' के प्रतीक हैं। कालगणना सूर्य की गति पर ही आधारित है।
-
पुरातात्विक साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि सूर्योपासना 8000-9000 ईसा पूर्व से प्रचलित हुई। जैसे-जैसे सभ्यता का विकास हुआ, वैसे-वैसे सूर्य की महत्ता और उसकी उपासना में वृद्धि होती गई। वाल्मीकि रामायण में उल्लेख है कि राम-रावण युद्ध के दौरान महर्षि अगस्त्य के परामर्श से भगवान् राम ने आदित्यहृदय स्तोत्र के रूप में भगवान् सूर्य की स्तुति की थी। महाभारत में उल्लेख है कि युधिष्ठिर के पास 1000 सूर्योपासक ब्राह्मण आए थे, जिनके 8000 अनुयायी थे। इस प्रकार सौर सम्प्रदाय महाभारत काल में अस्तित्व में आ गया था।
पुराणों के अनुसार अदिति के 12 पुत्र आदित्य के नाम से प्रसिद्ध हुए-
धाता मित्रोऽर्यमा रुद्रो वरुण सूर्य एव च,
भगो विवस्वान् पूषा च सविता दशमः स्मृतः।
एकादशस्तथा त्वष्टा विष्णुर्द्वादश उच्यते।
अर्थात् (1) धाता, (2) मित्र, (3) अर्यमा, (4) रुद्र, (5) वरुण, (6) सूर्य, (7) भग, (8) विवस्वान्, (9) पूषा, (10) सविता, (11) त्वष्टा और (12) विष्णु।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार भगवान् सूर्य का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा के साथ हुआ। संज्ञा के गर्भ से तीन सन्तानें हुईं— यमुना, वैवस्वत मनु और यम। संज्ञा सूर्य का तेज सह नहीं सकीं और उनके पास अपनी छाया छोड़कर पिता के पास लौट आई। तब विश्वकर्मा ने सूर्य के तेज को थोड़ा कम किया, जिससे संज्ञा उसे सहन कर सकी। संज्ञा और छाया के अलावा राज्ञी और प्रभा भी सूर्य की पत्नियाँ बताई गई हैं। प्रभा से प्रभात का तथा छाया से सावर्णि, शनि तथा तपती का जन्म हुआ। अनेक स्थानों पर उषा का भी सूर्य की पत्नी के रूप में उल्लेख हुआ है।
Denne historie er fra January 2024-udgaven af Jyotish Sagar.
Abonner på Magzter GOLD for at få adgang til tusindvis af udvalgte premiumhistorier og 10.000+ magasiner og aviser.
Allerede abonnent? Log ind
FLERE HISTORIER FRA Jyotish Sagar
Jyotish Sagar
क्या लिखा है हमारे भाग्य में...?
ज्योतिष और प्रारब्ध
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
ग्रहों के अंशों का महत्त्व
लग्न की डिग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। कुण्डली में जितने भी ग्रहों की डिग्री लग्न की डिग्री के आस-पास होते हैं, वे सभी अपना पूर्ण फल देने में समर्थ होते हैं।
8 mins
May 2026
Jyotish Sagar
जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें मनाएँ कैसे?
मनुष्य का पूरा जीवन 9 ग्रहों की 27 नक्षत्रों में चाल और दृष्टि पर टिका हुआ है। सामान्य भाषा में कहें, तो जब ग्रहों की कृपा होती है, तो मनुष्य बलवान् हो जाता है और जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो वह भिखारी भी बन जाता है। इस आलेख में हम बता रहे हैं कि जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें कैसे मनाएँ?
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कन्या लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल
कैसे करें सटीक फलादेश (भाग-227)
7 mins
May 2026
Jyotish Sagar
श्रीशंकराचार्यकृत श्रीनृसिंहभुजङ्गस्तोत्रम्
(मूल मातृका/पाण्डुलिपि से प्रथम बार प्रकाशित एवं अनूदित)
6 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कोकिलावन जहाँ शनिदेव रो पड़े श्रीकृष्ण के दर्शन को!
मथुरा जनपद की पावन भूमि, जहाँ प्रत्येक कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगन्ध व्याप्त है, वहीं कोसी और नन्दगाँव के मध्य स्थित कोकिलावन दिव्य और रहस्यमयी तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
3 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कैसी रहेगी सम्राट चौधरी की सरकार?
शपथ ग्रहण कुण्डली विश्लेषण
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कुण्डली में विवाह, सन्तान एवं दाम्पत्य सुख : एक पर्यवेक्षण
मनुष्य जीवन का सबसे कोमल, जटिल और जरूरी पक्ष होता है- विवाह, सन्तान और दाम्पत्य जीवन। यह वह पक्ष है जहाँ प्रेम, आत्मीयता, त्याग और संघर्ष की असली परीक्षा होती है।
5 mins
May 2026
Jyotish Sagar
नीचराशिस्थ बुध के फल
जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन (भाग-21)
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
वोट से क्रान्ति के नायक पीटर माग्यार
जन्मपत्रिका विश्लेषण
9 mins
May 2026
Translate
Change font size
