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कुश से लेकर विवाद, शिलान्यास और उद्घाटन तक राम मन्दिर
Jyotish Sagar
|January 2024
वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या नगरी की स्थापना मनु द्वारा की गई थी। विभिन्न राजाओं ने इस नगरी में निर्माण एवं विस्तार का कार्य किया। दशरथ जी ने भी यहाँ कई इमारतें बनवाईं।
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अयोध्या नगरी के कौशल्या जी के महल में ही भगवान् राम का जन्म हुआ था। रामयुग में अयोध्या का वैभव इन्द्रलोक की अमरावती जैसा था, परन्तु भगवान् श्रीराम की जलसमाधि के पश्चात् अयोध्या कुछ समय के लिए उजाड़ हो गई थी। बाद में श्रीराम के पुत्र कुश ने अयोध्या का पुनर्निर्माण करवाया और उसके बाद महाभारत काल तक 31 राजाओं ने शासन किया। कुश की 31वीं पीढ़ी में में राजा बृहद्बल हुए। उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरव पक्ष की ओर से लड़ते हुए अभिमन्यु के हाथों वीरगति प्राप्त की थी। राजा बृहद्बल के बाद उनका पुत्र बृहत्क्षण शासक बना और उसके पाण्डवों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध थे। बाद में अयोध्या में उज्जैन के सम्राट् विक्रमादित्य ने लगभग 100 ईसा पूर्व एक भव्य मन्दिर का निर्माण करवाया। कहते हैं कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि पर काले रंग के कसौटी पत्थर वाले 84 स्तम्भों पर विशाल मन्दिर का निर्माण करवाया था। शुंग वंश के प्रथम शासक पुष्यमित्र शुंग ने भी मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया था। इसका एक शिलालेख अयोध्या से प्राप्त होता है।

Denne historie er fra January 2024-udgaven af Jyotish Sagar.
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