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हिन्दू संस्कृति में रीति रिवाजों का वैज्ञानिक महत्त्व
Sadhana Path
|May 2026
हम सदियों से विभिन्न परम्पराओं, रीति-रिवाजों को मानते चले आ रहे हैं पर शायद हममें से बहुत कम लोग ही इसके पीछे विद्यमान तथ्यों को जानते होंगे के हम इनका अनुसरण क्यों करते हैं ? आइए लेख के माध्यम से जानें इन परंपराओं एवं रीति-रिवाजों में निहित वैज्ञानिकता को।
भारतीय संस्कृति में जितने भी रीति-रिवाज और परम्पराएं हैं उन सबका वैज्ञानिक महत्त्व है। हमारे ऋषि मुनियों के गहन अध्ययन का नतीजा हैं। अब वैज्ञानिक तथा आयुर्वेद ने भी अपने शोधों से यह प्रमाणित कर दिया है कि ऋषि मुनियों और हमारे पूर्वजों द्वारा चलाई गई ये परम्परायें मानव जीवन के लिए बहुत फायदेमंद हैं तथा जरूरी भी हैं। जैसे हमारे बुजुर्ग प्रातः उठकर अपने दोनों हाथों को देखते हैं और उसमें ईश्वर का दर्शन करते हैं। धरती पर पैर रखने से पहले धरती मां को प्रणाम करते हैं क्योंकि जो धरती मां धन-धान्य से परिपूर्ण करती है हमारा पालन पोषण करती है, उसी पर हम पैर रखते हैं।
इसीलिए धरती पर पैर रखने से पहले उसे प्रणाम कर उससे माफी मांगते हैं।
हमारे सभी रीति-रिवाज और त्योहार हमारे संबंधों को मजबूत करते हैं जैसे- रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम को बढ़ाता है। करवाचौथ दाम्पत्य जीवन में मधुरता लाता है। ऐसे ही छठ में मां अपने बच्चे की लम्बी उम्र के लिए व्रत करती है।
हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता और गुरु के पैर छूने की परंपरा है माता-पिता और बड़ों को अभिवादन करने से मनुष्य की चार चीजें बढ़ती हैं। आयु, विद्या, यश और बल।
'अभिवादन शीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन । चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलं ।।'सज्जन और श्रेष्ठ लोगों का अपना एक प्रभा मंडल होता है और जब हम अपने गुरु और अपने से बड़ों के पैर छूते हैं तो उसकी कुछ अच्छाईयां हमारे अंदर भी आ जाती हैं। आज हम अपनी परम्पराएं और रीति रिवाज भूलते जा रहे हैं और समाज विघटन की ओर अग्रसर हो रहा है ऐसे में आवश्यकता है की हम अपने रीति-रिवाजों और परंपरा के पीछे वैज्ञानिक कारणों को जाने और उन्हें अपनाकर अपना जीवन सुखमय बनायें। अगर आप इन परम्पराओं को गहराई से देखें और वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो आप पायेंगे कि हमारे ऋषि मुनियों और पूर्वजों ने गहन अध्ययन करके मनुष्य के लाभ के लिए इनको शुरू किया था। ये हमें स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत सी बीमारियों और समस्याओं से बचाती हैं। और इसे वैज्ञानिक भी प्रमाणित कर चुके हैं।
Denne historie er fra May 2026-udgaven af Sadhana Path.
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