हाथरस गैंगरेप लुटतीमरती लड़कियां
Sarita|October Second 2020
हाथरस गैंगरेप लुटतीमरती लड़कियां
हाथरस में दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और फिर उस की हत्या करना आधुनिक इतिहास का वह काला पन्ना है जिसे बीते 6 सालों से लगातार छिपाने की कोशिश की जाती रही. उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा मामले को रफादफा किए जाने की कोशिश समाज में व्याप्त बीमारू धर्मप्रणाली और जहरीली मानसिकता का जीताजागता उदाहरण है.
शैलेंद्र सिंह

देश की मोदी सरकार के नोटबंदी, जीएसटी, धारा 370, तालाबंदी और कृषि कानून जैसे एकतरफा फैसलों की तरह उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गैंगरेप की शिकार दलित लड़की के शव को उस के मातापिता को न दे कर तानाशाही रवैया अपनाते हुए जलवा डाला. दलित समुदाय गुस्से में है.उसे अपनी हालत 'समुद्र मंथन' में सहयोग देने वाले असुरों की तरह लग रही है जिन को समुद्र मंथन करने के बाद भी, छलपूर्वक, अमृत पीने के लिए नहीं दिया गया.

भारतीय जनता पार्टी ने हिंदू राष्ट्र की स्थापना में दलितों को साथ देने के लिए कहा, स्वार्थवश दलितों के घर में खाना खाया पर सत्ता मिलने पर उन को कोई अधिकार न दिया.

दलितों की नाराजगी हाथरस गैंगरेप के चलते देखने को मिली. भाजपा के कुछ दलित नेताओं ने खुल कर तो कुछ ने ढकेछिपे रूप से अपनी सरकार का विरोध किया. हाथरस के भाजपा सांसद भी सवालों के घेरे में हैं. हाथरस कांड में जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लिया गया उस से साफ है कि योगी के खिलाफ पार्टी के अंदर विद्रोह के हालात हैं. दिल्ली की गोदी मीडिया का विरोध भी समझने वाला है. योगी कहते हैं, "उत्तर प्रदेश में जातीय हिंसा फैलाने के लिए 100 करोड़ रुपए की फंडिग हुई है. साजिश करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे.

पुलिस प्रशासन ने 400 से अधिक लोगों को जांच के घेरे में लिया है. हाथरस गैंगरेप की गूंज संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गई. आधी रात में लड़की के शव को जलाए जाने के इस फैसले को अदालत ने 'भयानक' कहा है. षड्यंत्र का यही सब से अहम हिस्सा था. यह फैसला किस के इशारे पर किया गया, जिस की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने लाड़ले मुख्यमंत्री को फोन करना पड़ा? योगी को मुख्यमंत्री पद से हटाने और केंद्र सरकार में उन को बुलाने, नए मुख्यमंत्री के तौर पर कई ब्राह्मण नेताओं के नाम सोशल मीडिया पर प्रचारित करने के पीछे कौन था?

कहीं कोई ऐसी ताकत तो नहीं है जो मोदीयोगी से मनमाने फैसले करा कर उन को पद से हटाने की साजिश रच रही है. मोदीराज में भाजपा ने राममंदिर बनाने का सारा काम ही पूरा नहीं किया बल्कि उस से जुड़े ढांचे को गिराने के विवाद को भी खत्म कर दिया है. मोदी से हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए किए जाने वाले सारे काम पूरे हो चुके हैं. हाथरस कांड का प्रभाव बिहार के चुनाव पर भी पड़ेगा, जो केंद्र की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है. ऐसे में यह साजिश मोदीयोगी दोनों के खिलाफ लगती है.

भाजपा नेताओं का दलित घरों में खाना खाने, प्रधानमंत्री द्वारा दलितों के पैर धोने और दलित के राष्ट्रपति बनाने से दलितों की सामाजिक व आर्थिक हालत में बदलाव नहीं आ रहा. हाथरस और बलरामपुर में दलित लड़कियों के साथ हुई घटनाएं तो बानगी मात्र हैं, पिछले 10 सालों में देश में दलित उत्पीड़न की घटनाएं 66 फीसदी बढ़ी हैं. महादलित परिसंघ के महासचिव चंदनलाल वाल्मीकि कहते हैं, “गांवों में वाल्मीकि परिवारों की संख्या कम है. इस कारण इन को दबाया जाता है. प्रशासन इन के दर्द की अनदेखा करता है. इस वजह से इन के शोषण की घटनाएं कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं."

उमा भारती ने दिलाई रामराज की याद

हम ने अभी राममंदिर का शिलान्यास किया है और आगे देश में रामराज्य लाने का दावा किया है, किंतु इस घटना पर पुलिस की संदेहपूर्ण कार्यवाही से आप की और भाजपा की छवि पर आंच आई है." उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भाजपा नेत्री व मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपने ट्वीट संदेश में हाथरस गैंगरेप मामले में विरोध दर्ज कराया. योगी और उमा दोनों ही रामायण, महाभारत व दूसरे धार्मिक ग्रंथों को जाननेसमझने वाले हैं. उमा भारती ने रामायण का भी जिक्र किया जिस का लेखन मूलरूप से महर्षि वाल्मीकि ने किया था. महर्षि वाल्मीकि वंचित व शोषित समाज से थे.

हाथरस के बूलगड़ी गांव में गैंगरेप की शिकार हुई लड़की भी वाल्मीकि समाज की है. रामायण में राम ने सीता को इसलिए छोड़ा था कि औरत पर लगे कलंक के मसले में समाज की राय को उपर रखा जा सके. गैंगरेप के मामले में भी लड़की शर्म के मारे पहले चुप रही, क्योंकि बलात्कार में समाज लड़की को ही दोषी मानता है. अगर लड़की में आत्मविश्वास होता और समाज उसे संबल देता तो लड़की खुल कर पहले ही दिन गैंगरेप की बात को स्वीकार कर लेती. लड़की ने शर्म में गैंगरेप की बात नहीं बताई तो यह आरोप लग रहा है कि वह झूठ बोल रही है. अगर गैंगरेप हुआ होता तो पहले ही बताती. बताने या न बताने, दोनों ही मामलों में जुल्म का शिकार तो लड़की ही हुई.

ऐसा ही तो रामराज में भी हुआ था. लंका में सीता ने अग्निपरीक्षा दे कर खुद को निर्दोष साबित किया था. इस के बाद भी एक धोबी के कहने पर सीता को फिर से त्याग दिया गया. यह पितृसत्तामक सत्ता है. जहां पुरुष मालिक और औरत गुलाम होती है. सदियों से यह सत्ता ऐसे ही चली आ रही है. अहल्या को देखें तो यह बात पुख्ता हो जाती है. अहल्या गौतम ऋषि की पत्नी थी. एक दिन सुबहसवेरे जब गौतम ऋषि पूजापाठ और स्नान के लिए नदी तक गए थे, देवराज इंद्र ने अहल्या से छल करने के लिए गौतम ऋषि का भेष रखा. यह बात जब गौतम ऋषि को पता चली तो उन्होंने सारी गलती अहल्या की ही निकाली और उस को पत्थर हो जाने का श्राप दे दिया. इस में अहल्या का क्या दोष था, यह बात किसी को समझ न आई.

हाथरस में गैंगरेप की शिकार लड़की का भी क्या दोष था? 14 सितंबर को वह अपने घर के जानवरों के चारे के लिए घास लेने बाजरे के खेत में गई थी. साथ में उस की मां भी थी. इस के बाद भी उस के साथ दिनदहाड़े सुबह साढ़े 9 बजे गैंगरेप हो गया. अपने घरपरिवार के साथ वह चंदपा थाने गई तो वहां जांच और रिपोर्ट के नाम पर समय लगाया गया. पहले उसे इलाज के लिए हाथरस के जिला अस्पताल में रखा गया. वहां इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं थी. रीढ़ और गले की हड्डी में लगी चोट के कारण लड़की की हालत खराब हो रही थी. कोरोना के डर से अस्पताल खाली थे. घटना के 6 दिन बिना अच्छे इलाज के लड़की तिलतिल कर मरने को मजबूर थी. इस के बाद उसे अलीगढ़ मैडिकल कालेज भेजा गया. वहां से 28 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया जहां अगले दिन यानी 29 सितंबर को लड़की की जान चली गई.

लुटतीमरती बेटियां

उत्तर प्रदेश में यह कोई पहली घटना नहीं थी. नैशनल क्राइम रिकौर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि हर 2 घंटे में बलात्कार का एक मामला दर्ज होता है. 2017 में 4,669, 2018 में 3,946 और 2019 में 3,065 मामले दर्ज किए गए थे. अगर सत्ता के प्रभाव वाले मामलों को देखें तो पुलिस कभी भी यह स्वीकार नहीं करती कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू कहते हैं, "योगी सरकार के सत्ता में आने से महिलाओं पर अपराध बढ़े हैं. पुलिस मुकदमे नहीं लिखती, धाराओं में हेराफेरी कर के आरोपियों को बचाने का काम करती है. योगी मुख्यमंत्री नहीं, तानाशाह की तरह से सरकार चला रहे हैं.

उन्नाव में भाजपा के विधायक कुलदीप सेंगर से नौकरी मांगने गई लड़की के साथ बलात्कार किया गया. जब उस ने शिकायत की तो उस के परिवार वालों को पुलिस व प्रशासन के साथ मिल कर प्रताड़ित किया गया, जान से मरवाया और जेल भिजवाया गया. अपराध को दबाने के लिए जो संभव था वह किया गया. प्रदेश सरकार उस समय भी कुलदीप सेंगर के साथ थी. कोर्ट और समाज के विरोध के बाद सीबीआई जांच हुई और कुलदीप को सजा मिली. विधायकी गई.

शाहजंहापुर में तो भाजपा के पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद का अपने कालेज में पढ़ाई कर रही लड़की के साथ अश्लील वीडियो वायरल हुआ. लड़की ने यौनशोषण का आरोप लगाया. पुलिस ने लड़की को न्याय देने की जगह उस को ब्लैकमेलिंग के आरोप में उलटे फंसा दिया. स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया. साधारण धाराओं के तहात मुकदमा दर्ज किया गया. कोर्ट से जमानत मिल गई.

उन्नाव, शाहजहांपुर और हाथरस तीनों जगह 3 बातें समान हैं. पहली बात यह कि लुटती, मरती बेटियां ही यहां अन्याय का शिकार हुईं. दूसरी बात, सत्ता ने लड़कियों की मदद की जगह आरोपियों को बचाने का काम किया. तीसरी और सब से अहम बात, तीनों ही मामलों में मुख्यमंत्री योगी पर अत्याचारियों को संरक्षण देने का आरोप लगा.

सत्ता के खिलाफ साजिश?

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