उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को लुभाने में जुटी भाजपा
Sarita|September Second 2020
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को लुभाने में जुटी भाजपा
मंडल कमीशन लागू होने के बाद भाजपा के राज में ब्राह्मण सदियों बाद पूरे देश में सत्ता में आए हैं. पर अब उन का एक वर्ग नाराज होने लगा है.
शैलेंद्र सिंह

प्रायागराज में कुंभ का आयोजन चल रहा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां गए और सफाई करने वालों का सम्मान किया. उन के पांव पखारे और उपहार भी दिया. ऐसे ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो मौनव्रत रख अयोध्या में रहने वाले दलित परिवार के पास रहनेखाने चले गए. लेकिन 2019 के पिछले लोकसभा चुनाव के पहले की और अब की भाजपा की शासननीति में बदलाव साफ दिख रहा है.

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को जब बहुमत मिला, तो उस ने उत्तर प्रदेश में सहयोगी पार्टी अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओमप्रकाश राजभर को दरकिनार कर दिया. ये दोनों ही दलित और पिछड़ों की अगुआई करने वाले थे. इस के बाद भी सदियों दुत्कारे गए दलित व पिछड़े पूरी तरह से भाजपा के साथ रहे. पर एक कहावत है, 'जो खड़ा था वह खड़ा ही रह गया पर जो बैठा था वह हायहाय चिल्लाने लगा.' कुछ इसी तरह बेचारे दलितपिछड़े तो चुप रहे जबकि ब्राह्मण अपनी थोड़ी सी उपेक्षा को ले कर भी आवाज बुलंद करने लगे.

धार्मिक कहानियों, धर्मशास्त्रों, पुराणों, स्मृतियों के बताए रास्ते पर चल कर सत्ता की कुरसी हासिल करने वाली भाजपा अब पिछड़ों और दलितों की चिंता करने का दिखावा भी छोड़ कर वापस ब्राह्मण वर्चस्व के लिए तेजी से काम करना शुरू कर चुकी है.

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