कांग्रेस पार्टी सवाल नेतृत्व का
Sarita|September First 2020
कांग्रेस पार्टी सवाल नेतृत्व का
नेतृत्व को ले कर कांग्रेस के 23 बड़े नेताओं द्वारा हाई कमान को लिखी गई चिट्ठी पर पार्टी में खूब घमासान मचा. इतिहास साक्षी है कि अनुभवी कांग्रेस ऐसी कई उठापटकों से हो कर आगे निकलती रही है. अब मुद्दा यह है कि इस विशाल राष्ट्रीय पार्टी की मिक्स्ड कल्चर वाली विचारधारा को क्या गैरगांधीनेहरु परिवार से आया कोई दूसरा नेता ढो पाएगा? जानें इस लेख में.
नसीम अंसारी कोचर

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) की औनलाइन मीटिंग में मचे घमासान के बाद यह तो तय हो गया कि फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष पद पर सोनिया गांधी के अलावा किसी भी कांग्रेसी नेता को सर्वसम्मति से चुना जाना मुश्किल खीर है. राहुल गांधी को ले कर भले कुछ लोग नाकभी चढ़ाते हों, मगर गांधी परिवार के सदस्य के अलावा किसी अन्य नेता के नाम पर कांग्रेसियों का एकमत होना संभव नहीं है.

कांग्रेस पार्टी में खेमेबाजी चरम पर है. अंदर ही अंदर कई गुट बन गए हैं. पुराने घिसे चावल अलग, नए खिले चावल अलग. गौरतलब है कि राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद सोनिया गांधी बीते एक साल से पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी हुई हैं. पार्टी के भीतर जड़ें जमाए बैठे बुजुर्ग दरख्तों के बीच काफी समय से हलचल मची हुई है कि इस पद पर गांधी परिवार से बाहर का कोई आदमी काबिज हो जाए, जिस को वे अपनी उंगलियों पर नचा सकें. जिस को सामने रख कर वे पार्टी में अपनी मरजी चला सकें. जो इन खाएअघाए नेताओं की ओर आंख उठाने या सवाल उठाने की जुर्रत न कर सके.

वहीं, सोनिया गांधी कब तक अंतरिम अध्यक्ष बनी रह सकती हैं वह भी तब जब उन का स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा हो. वे अब उस तरह सक्रिय नहीं रह पाती हैं जैसे पहले रहा करती थीं. बुजुर्ग दरख्तों ने नए अध्यक्ष के लिए खिचड़ी पकानी शुरू कर दी, लेकिन 24 अगस्त को हुई सीडब्लूसी की मीटिंग में पता चला कि खिचड़ी जल गई और जले के निशान इतने गहरे कि अब तो इन्हें रगड़ना पड़ेगा.'

खैर, कांग्रेस के पास दाग साफ करने के लिए अब एक साल का समय है क्योंकि मीटिंग में काफी मानमनौवल के बाद सोनिया गांधी ने अगले एक साल तक अंतरिम अध्यक्ष पद पर बने रहना स्वीकार कर लिया है.

यह बात ठीक है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी की मजबूती और पार्टी के कामों को सुचारु रूप से चलाने के लिए स्थायी और सक्रिय अध्यक्ष का होना जरूरी है. स्थायी अध्यक्ष के लिए खुद सोनिया गांधी भी चिंतित हैं और इसीलिए उन्होंने सीडब्लूसी की मीटिंग में यह बात कही कि अब पार्टी को उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, यानी नए अध्यक्ष की खोज होनी चाहिए. हालांकि यह बात उन्होंने उस चिट्ठी से आहत हो कर कही जो कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं ने उन को उस वक्त लिखी थी जब वे बीमार थीं और अस्पताल में भरती थीं.

नेतृत्व परिवर्तन को ले कर लिखी गई इस चिट्ठी पर सीडब्लूसी की औनलाइन बैठक में खूब बवाल मचा. पहले यह सोचा जा रहा था कि सीडब्लूसी की बैठक नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा के लिए होगी, कई नाम भी हवा में उछल रहे थे, लेकिन पूरी बैठक चिट्ठी के इर्दगिर्द ही बनी रही. चिट्ठी पर आंसू बहे, माफियां मांगी गईं, मानमनौवल हुई, कुछ नेताओं को राहुल गांधी ने रगड़ा, कुछ को प्रियंका ने धोया, कुछ तिलमिला कर बैठक के बीच ही ट्वीटट्वीट खेलने लगे, एक सज्जन ने तो बाकायदा अपने खून से पत्र लिख डाला. कुल जमा यह कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की पूरे दिन की बैठक लैटरबम के धुएं में गुजर गई और आखिर में यही तय हुआ कि अध्यक्ष पद पर अभी सोनिया गांधी ही बनी रहेंगी.

सोनिया गांधी का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है. बीते कुछ समय के दौरान वे कई बार अस्पताल में भी दाखिल रही हैं. वे खुद अब पार्टी की जिम्मेदारियों से मुक्त हो कर आराम करना चाहती हैं.

परिवार बनाम मनुवाद

विचारणीय यह है कि नया अध्यक्ष क्या गांधी परिवार से बाहर का कोई हो सकता है? क्या इतना दम किसी में है कि वह पूरी पार्टी को अपने अनुसार चला ले? क्या है ऐसा कोई चेहरा कि तमाम कांग्रेसी कार्यकर्ता, समर्थक, नए पुराने बूढ़ेजवान नेता और खुद गांधी परिवार जिस के पीछे चल सके? है कोई चेहरा जो जनता के वोट कांग्रेस की झोली में खींच सके? और सब से खास बात यह कि क्या गांधी परिवार के अलावा कोई ऐसा है जो पार्टी में जड़ें जमाए बैठे और ब्राह्मणवादी सोच से लबरेज घाघ नेताओं की करतूतों पर उन्हें खुलेआम खरीखोटी सुनाने का दम रखता हो? शायद नहीं.

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

September First 2020