कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरैपी
Sarita|July Second 2020
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कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरैपी
कोरोना के लगातार बढ़ते कहर को रोकने और मरीजों को स्वस्थ करने के लिए डाक्टर प्लाज्मा धेरैपी का इस्तेमाल कर रहे हैं. आइए जानें यह कैसे काम करती है और इलाज में कैसे मददगार है.
डा. विकास मौर्य

को विड-19 एक प्रकार का वायरल रोग है जो नीवल कोरोना वायरस से फैलता है. अभी तक इस से बचाव का कोई उपचार नहीं मिला है. इस पृष्ठभूमि में कई उपचार विधियों पर फिलहाल काम चल रहा है. कौन्वेसलेसेंट प्लाज्मा थेरैपी ऐसी ही एक उपचार प्रक्रिया है जिस की फिलहाल इस रोग से बचाव के सिलसिले में जांच की जा रही है, ऐसा नहीं है कि कौन्वेसलेसेंट प्लाज्मा धेरैपी की इस से पहले अन्य रोगी के इलाज के लिए नहीं परखा गया है. इबोला, डिप्थीरिया, स्कारलेट फीवर, परट्यूसिस, स्पैनिश फ्लू, मेर्स-कीव, एचाएन। समेत अन्य कई वायरल और औटो-इम्यून रोगी के इलाज के लिए कौन्वेसलेसेंट ब्लड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता रहा है.

इस उपचार पद्धति में कोविड-19 रोग से ग्रस्त मरीज के स्वस्थ होने के बाद उस के शरीर से लिए गए प्लाज्मा का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे मरीर्जी के प्लाज्मा में स्वस्थ होने के बाद वायरस के खिलाफ एंटीबौडीज बन चुकी होती हैं. हालांकि ऐसा नहीं है कि सभी के रक्त में पर्याप्त मात्रा में एंटीबौडी का उत्पादन हो, लेकिन आमतौर पर अधिकांश मरीजी में एंटीबॉडीज पाई जाती हैं.

अधिकांश मरीर्जी में दूसरे सप्ताह से एंटीबौडी (आईजीएम) बनने लगती हैं और तीसरे सप्ताह तक आते आते इन की संख्या काफी हो जाती है, स्वास्थ्य का लाभ करने की अवधि में और जब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके होते हैं तो उन के रक्त में एक अन्य प्रकार की एंटीबौडी आईजीजी भी बनती है जो उन्हें कुछ महीनों तक सुरक्षा देती है.

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