अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव 2020 ले डूबेंगे ट्रंप के तेवर
Sarita|July Second 2020
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अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव 2020 ले डूबेंगे ट्रंप के तेवर
अमेरिका में कोरोना के कहर पर चुनाव की लहर भारी पड़ रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जीत पर हर किसी को संशय है. वे अपने जिद्दी और अड़ियल रवैए के चलते पिछड़ते नजर आ रहे हैं. दुनिया के सब से ताकतवर देश का लोकतंत्र कैसे कमजोर पड़ता जा रहा है, पढ़िए इस लेख में.
नसीम अंसारी कोचर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ढीठ और जिद्दी रवैए को जहां एक और अमेरिका में कोरीना संक्रमण के बुरी तरह फैलने और लाखों अमेरिकी नागरिकों की जान जाने का जिम्मेदार माना जा रहा है, वहीं दूसरी और ट्रंप और उन की पुलिस की रंगभेदी व नस्लभेदी, दक्षिणपंथी सोच और व्यवहार की दुनियाभर में आलोचना हो रही है.

ट्रंप प्रशासन का रंगभेदी और नस्लभेदी चेहरा उस समय खुल कर सामने आ गया जब एक अश्वेत अमेरिकी नागरिक जौज फ्लोयड को सरेआम जमीन पर गिरा कर पुलिस के गोरे जवान ने अपने घुटर्नी से उस की गरदन तब तक दबाए रखी जब तक कि उस की सांस नहीं रुक गई.

जौर्ज फ्लोयड चीखता रहा कि वह सांस नहीं ले पा रहा है, लेकिन श्वेत जवान के मन में अश्वेतों के प्रति इतनी नफरत भरी थी कि उस ने जौर्ज की गरदन तब तक नहीं छोड़ी जब तक वह मर नहीं गया.

खुद को विश्व का संरक्षक समझने वाले अमेरिका की सड़क पर खुलेआम इस नरसंहार की घटना ने पूरे देश और दुनियाभर में हाहाकार मचा दिया. कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच भी लोग ट्रंप प्रशासन के खिलाफ घरों से निकल कर जगहजगह बैनरपोस्टर ले कर सड़कों पर उतर आए और जम कर नारेबाजी की.

दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों का डंका पीटने वाला अमेरिका अपने ही आंगन में श्वेत पुलिसकर्मी के घुटने तले दम घुटने से अफ्रीकीअमेरिकी नागरिक की मौत के बाद समता, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा में नाकामी के कारण कठघरे में है.

डोनाल्ड ट्रंप की खूब लानतमलामत हुई, मगर इस अमानवीय कृत्य के लिए शर्मसार होने और देश व दुनिया से माफी मांगने की बात तो दूर, ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए उन पर आंसू गैस के गोले छुड़वाए, रबड़ की गोलियों का इस्तेमाल करवाया. यही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रदर्शनकारियों को ठग कहा और उन्हें गोली मारने व उन के खिलाफ सेना को इस्तेमाल करने तक की धमकी दे डाली.

ट्रंप का अड़ियल रवैया

इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप का अमानवीय, अड़ियल, अहंकारी, दक्षिपपंथी, नस्लभेदी और रंगभेदी सोच से भरा दिलोदिमाग उन के देश और दुनिया के आगे पूरी तरह खुल गया. उन की संकीर्ण मानसिकता और दंभ तब और मुखर हुआ जब प्रदर्शनकारियों पर सेना तैनात करने की धमकी के बीच उन्होंने कहा, "मैं कानून एवं व्यवस्था का राष्ट्रपति हूं."

गौरतलब है कि देश को चलाने वाला पिता के समान होता है. उस की भाषा में सौम्यता, व्यवहार कुशलता और समझदारी की अपेक्षा होती है, लेकिन इस भाव के विपरीत राष्ट्रपति ट्रंप की भड़काऊ भाषा ने प्रदर्शनों को हिंसक रूप दिया.

ट्रंप ने जिस तरह से स्थिति की संभालने की कोशिश की, वह सैन्यवादी प्रतिक्रिया थी, जिस ने प्रदर्शनकारियों की और ज्यादा उकसाया और अमेरिकी समाज में गोरे व काले, अमीर और गरीब के विभाजन की गहरा किया. हालात यहां तक खराब हुए कि प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस तक पहुंच गए और राष्ट्रपति ट्रंप को बंकर में छिपना पड़ा.

क्षेत्रफल के हिसाब से महादेश कहलाने वाले तमाम जनसंस्कृतियों से युक्त अमेरिका के आधे से ज्यादा राज्य आज नस्लीय नफरत के विरोध की आग में जल रहे हैं. ट्रंप के शासनकाल में उभरे ये विरोध प्रदर्शन अप्रैल 1968 में डा. मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों की याद दिलाते हैं.

ये विरोध प्रदर्शन सिर्फ अश्वेत नागरिक की हत्या के कारण ही पैदा नहीं हुए. दरअसल, यह ट्रंप प्रशासन के दौरान हुए अनेक दंगों के कारण अमेरिका में जी विभाजनकारी हालात बन गए हैं, उन को ले कर ट्रंप के खिलाफ अमेरिकियों के गुस्से का इजहार भी था. फ्लोयड की मौत ने तो, बस, अमेरिकी जनता के गुस्से के लिए एक चिनगारी का काम किया था.

अमेरिकी मीडिया का मानना है कि देश का लीडर होने के नाते देश और उस की जनता को सुरक्षित रखने में डोनाल्ड ट्रंप बुरी तरह फेल हुए हैं. कोरोना वायरस महामारी के कारण अब तक अमेरिका में एक लाख से अधिक लोर्गी की मौत हो चुकी है, वायरस की मार ने अमेरिका के लोगों को तोड़ कर रख दिया है. 4 करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार हो चुके हैं और लाख की तादाद में लोग अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए जगहजगह खुले फूडबैंक पर निर्भर हैं.

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