पालघर मौब लिंचिंग बवाल क्यों
Sarita|May First 2020
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पालघर मौब लिंचिंग बवाल क्यों
पालघर के अमानवीय और बर्बर हादसे का ठीकरा पुलिस के सिर फोड़ कर बचा नहीं जा सकता. दरअसल, मौब लिंचिंग कोई नई बात नहीं है. अकसर दलित मुसलमान ही इस का शिकार होते रहे हैं. इस बार नई बात 2 साधुओं का इस का शिकार हो जाना रही लेकिन हल्ला मचा रहे लोग अपनी गिरेबान में झांक कर देखेंगे तो उन्हें काफी कुछ समझ आएगा...
भारतभूषण

हादसा 16 अप्रैल की देररात का है. साल 2014 में महाराष्ट्र के नए जिले के रूप में अस्तित्व में आए पालघर, जो मुंबई से महज 87 किलोमीटर की दूरी पर है, में गांव वालों ने 2 साधुओं की बेरहमी से पीटपीट कर हत्या कर दी. एक वायरल हो रहे वीडियो में भीड़ के वहशीपन का नंगा सच साफसाफ दिख रहा है कि बेकाबू और बेलगाम भीड़ ने किस तरह एक और दर्दनाक व निर्मम वारदात को अंजाम दिया. पूरे देश की तरह पालघर में भी लौकडाउन लागू है, वहां भी कोरोना के मरीज मिले हैं.

यह थी घटना

18 अप्रैल तक इस घटना के बारे में किसी को कोई खास जानकारी नहीं थी सिवा पालघर प्रशासन के, लेकिन 19 अप्रैल को जैसे ही उक्त घटना का वीडियो वायरल हुआ तो हल्ला मचना शुरू हो गया. वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि पिटने वाले लोग साधुसंत हैं जो कि गेरुए कपड़े पहने हुए हैं. हल्ला मचा, तो पालघर के जिलाधिकारी कैलाश शिंदे ने विस्तार से घटना की जानकारी दी. उन के मुताबिक, मृतक साधु मुंबई के कांदीवली स्थित एक आश्रम के हैं जिन के नाम 35 वर्षीय सुशील गिरी और 70 वर्षीय चिकने महाराज कल्पवृक्ष गिरी हैं. ये दोनों ड्राइवर नीलेश के साथ मुंबई से सूरत के लिए किराए की गाड़ी ले कर एक मित्र संत की अंत्येष्टि में भाग लेने जा रहे थे.

जल्दी पहुंचने की गरज से इन लोगों ने महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों से हो कर जाना पसंद किया. केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली की सीमा पर बसे गांव गढ़चिचले के नजदीक वन विभाग के एक संतरी ने इन की गाड़ी को रोक लिया. इस इलाके में पिछले कुछ दिनों से यह अफवाह फैली हुई थी कि आसपास बच्चा चोरों और चोरी से फसल काटने वालों का गिरोह सक्रिय है.

इस गिरोह से निबटने के लिए गांव वालों ने एक निगरानी दल बना लिया था जो खासतौर से रात में निगरानी का काम कर रहा था. वन विभाग का संतरी अभी इन लोगों से पूछताछ कर ही रहा था कि तभी यह निगरानी दल आ गया जिस ने कुछ देर बाद साधुओं की धुनाई शुरू कर दी. देखते ही देखते वहां कोई 400 लोग इकट्ठा हो गए जिन्होंने बगैर सोचेसमझे डंडों और लात घूसों से सुशील गिरी और चिकने महाराज कल्पवृक्ष गिरी की पिटाई शुरू कर दी. बख्शा नीलेश को भी नहीं गया. मौजूद कुछ लोगों ने मारपिटाई के वीडियो भी बनाए.

संतरी ने अपनी ड्यूटी बजाते हो रहे हादसे की खबर 35 किलोमीटर दूर कासा थाने में दी. पुलिस आई भी लेकिन कुछ कर नहीं पाई क्योंकि भीड़ अपनी पर उतारू हो चुकी थी और पुलिस वालों की संख्या 3-4 ही थी. हालांकि, वीडियो में एक पुलिस वाला ही साधुओं को भीड़ से बचाने की नाकाम कोशिश करता नजर आ रहा है. भीड़ तब तक गाड़ी भी तोड़ चुकी थी और शायद उसे यह इल्म तक भी नहीं था कि साधु तो कब के मर चुके हैं. जैसेतैसे, पुलिस वालों ने घायल ड्राइवर और साधुओं को अपनी गाड़ी में पटका और ले गए.

जब मचा हल्ला

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