जाने क्या दिख जाए
Gambhir Samachar|August 01, 2020
जाने क्या दिख जाए
सियासत का लक्ष्य ही सत्ता होती है, जब सत्ता पर संकट का अंदेशा होता है तो फिर सियासत अपने बनावटी खोल से बाहर आती है और उसका नग्न स्वरूप सामने आता है. हालांकि भारतीय राजनीति में यह कोई नया वाकया नहीं है लेकिन राजस्थान की सियासत में आये तूफान ने फिर से कई चेहरों को बेनकाब करने की आधारशीला रख दी है.
जयेश पण्डया

राजस्थान में इसके पहले की वसुंधरा सरकार के समय पर्यटन विभाग की पंच लाइन थी 'जाने क्या दिख जाए' उस समय तो ऐसा कुछ दिखा नहीं लेकिन अब 2018 विधानसभा चुनाव के बाद से ही राजस्थान में बहुत कुछ दिख रहा है. पिछले वर्ष नवम्बर में हमने प्रदेश के इन्हीं सियासी हालातों पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी एक्सक्लुसिव प्रकाशित की थी और कुछ माह बाद ही इसी अंदरूनी कलह ने ऐसी करवट ली कि प्रदेश की राजनीति में ही भूचाल आ गया. यहां कांग्रेस के दो शीर्ष नेताओं अशोक गहलोत एवं सचिन पायलट की सियासी महत्वकांक्षाओं की जंग सड़क तक आ गयी और होटल होते हुए सीधे हाइकोर्ट पहुंच गयी.

तेजी से बदले सियासी समीकरण

10 जुलाई के दिन राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) ने राज्य में विधायकों की खरीद-फरोख्त और निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने के आरोपों में एक मामला दर्ज किया. हुआ ऐसा कि राज्य में राज्यसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ कांग्रेस ने कुछविधायकों को प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया था. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि राज्य में विधायकों को प्रलोभन दिया जा रहा है और करोड़ो रुपये कैश जयपुर लाया जा रहा है. 10 जुलाई को ही सीएम अशोक गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि बीजेपी हमारी सरकार गिराने में लगी है. ये लोग (भाजपा नेता) सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़-फोड़ करें. खरीद फरोख्त कैसे करें ... इन तमाम काम में लगे हैं. इसी दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या सचिन पायलट भी मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, तो गहलोत ने इस सवाल को टालने के बजाय साफतौर पर कह दिया

कि कौन नहीं चाहता मुख्यमंत्री बनना?

11 जुलाई को मामला बढ़ गया और कांग्रेस की आंतरिक फूट सबके सामने आ गई. दरअसल 11 जुलाई को एसओजी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट व सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी को बयान देने के लिए नोटिस भेजा. पायलट इस चिट्ठी के बाद दिल्ली निकल गए और मीडिया से संपर्क भी खत्म कर दिया. उनके साथ राजस्थान कांग्रेस के बागी 24 विधायक हरियाणा के एक होटल में रुके. मीडिया में इन घटनाओं पर हड़कंप मचने के बाद आखिरकार कांग्रेस आलाकमान की भी नींद उड़ी और बड़े नेता एक्शन में आए. 12 जुलाई को लगातार अशोक गहलोत राजनीतिक ऊठापटक पर चर्चा के लिए कई नेताओं से मिले. इसी बीच वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने राजस्थान के हालात से चिंतित होकर उसी दिन सुबह एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, 'अपनी पार्टी के लिए चिंतित हूं, क्या घोड़ों के अस्तबल से निकलने के बाद ही हम जागेंगे?' कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली से रणदीप सुरजेवाला और अजय माकन को जयपुर भेजने का फैसला किया. उन्हें अगली सुबह मंत्रियों और पार्टी विधायकों की बैठक में हिस्सा लेना था. इसके लिए कांग्रेस विधायकों को व्हिप जारी किया गया. व्हिप को लेकर दोनों नेताओं का खेमा अलग-अलग दावे कर रहा था.

राजस्थान में जारी घटनाक्रम पर मध्यप्रदेश में से कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना दांव चला. अपने 'दोस्त' सचिन पायलट की 'कांग्रेस में नजरअंदाजी' पर उन्होंने दुख जताया. सिंधिया ने कहा कि 'कांग्रेस में प्रतिभा और क्षमता की कद्र कम होती है. उसके बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि पायलट भी सिंधिया के रास्ते पर चलकर बीजेपी में जाएंगे. सीएम अशोक गहलोत किसी भी हाल में सत्ता अपने हाथ से जाने नहीं देने वाले थे. उन्होंने मीडिया के सामने शक्ति प्रदर्शन किया. सीएम आवास पर बुलाई गई मीटिंग में आखिरकार 107 विधायक पहुंचे. गहलोत इन विधायकों के साथ विक्ट्री का साइन बनाते दिखे. सभी विधायकों को होटल रवाना कर दिया गया जहां वे लगातार सीएम के टच में रहेंगे.

कांग्रेस बीजेपी पर सरकार गिराने का आरोप लगा रही थी और हर हाल में नाराज सचिन पायलट को मनाने में लगी थी. प्रियंका गांधी ने पायलट से बात की. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर पर भी हलचल रही. इससे पहले पायलट के पोस्टर हटा दिए गए थे, फिर प्रियंका की बातचीत के बाद फिर लगा दिए गए. इसी बीच बीजेपी ने सचिन पायलट के लिए अपने दरवाजे खोल दिए. प्रदेश के कई बीजेपी नेताओं ने कहा कि बीजेपी की विचारधारा में विश्वास जताने वाले किसी भी नेता के लिए पार्टी के द्वार खुले हुए हैं. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, कोई भी बड़े जनाधार वाला नेता किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होना चाहे तो उसका स्वागत किया जाता है. हमारी विचारधारा में विश्वास जताकर कोई यदि हमसे जुड़ता है तो हम खुले हाथों से उसका स्वागत करेंगे. यह एक सामान्य प्रक्रिया है.' कई दिनों से नाराज चल रहे सचिन पायलट को मनाने के जब सारे प्रयास विफल हुए तो कांग्रेस ने आखिरकार सचिन पायलट समेत दो मंत्रियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई. सचिन पायलट को डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस अधयक्ष पद से हटा दिया गया. इसके साथ ही पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह और खाद्य मंत्री रमेश मीणा को भी पद से हटा दिया गया. सचिन पायलट की जगह पर प्रदेश कांग्रेस की कमान शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को सौंपी गई.

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