जिंदगी बदल देगी मां अंबे की ये सीख
Anokhi|October 24, 2020
जिंदगी बदल देगी मां अंबे की ये सीख
दुर्गा देवी हम सबके साथ नौ दिन बिता चुकी हैं। ये वक्त है ठहर कर मां के दिए प्रसाद को ग्रहण करने का। यह जानने का कि मां को आपने कितना जाना है और आप उनसे क्या क्या ग्रहण कर सकती हैं.
जयंती रंगनाथन

जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

दुर्गा सप्तशती का यह सिद्ध मंत्र आपने भी सुना होगा। कहते हैं कि इस मंत्र के जाप से महामारी का प्रकोप कम हो जाता है। महामारी दूर होने लगती है। दुनिया भर में इस समय यही प्रार्थना की जा रही है कि कोरोना महामारी की प्रचंडता से मानव को अब मुक्ति मिलनी चाहिए। दुर्गा देवी के बारे में कहा जाता है कि उनकी शक्ति हर औरत के भीतर होती है। बस उसको पहचानने और समय पर अमल करने की जरूरत होती है। जो देवी कोमलमना हो, जरूरत पड़ने पर राक्षसों का संहार भी करती है। जिनकी अनेक भुजाएं इस बात का भी प्रतीक है कि हर औरत मल्टीटास्किग में माहिर होती है।

पिछले आठ महीनों में हमारी दुनिया और सोचने-समझने के अंदाज में आमूलचूल बदलाव आया है। कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन, फिर अनलॉक की प्रक्रिया में हमने पाया कि हम एक वक्त परकितने सारे काम बखूबी कर सकते हैं। घर और बाहर का काम करते हुए ये आठ महीने बीत गए। नवरात्र के नौ दिनों में हम दुर्गा मां के विभिन्न रूपों को पूजते और अपने दिल में उतारते हैं। अगर ध्यान से देखें तो ये नौ रूप हमें अंदर और बाहर से मजबूत करते हैं। देवी का हर रूप हमें कुछ नाकुछ सिखाता है। ये ज्ञान ऐसे लाइफ स्किल्स हैं, जिन्हें अपनाकर हम आसानी से अपनी जिंदगी सरल, सहज और मजबूत बना सकते हैं। आइए जानें कि देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों से हम क्या-क्या सीख सकते हैं:

अंत ही शुरुआत है

अकसर हम सबको लगता है कि अब सब कुछ खत्म हो गया, इसके आगे अबकुछ नहीं हो सकता। यह सोच गलत है। इसके बाद ही शुरुआत होती है। दरअसल अंत जैसा कुछ होता ही नहीं है। मुसीबतों के दौर में जब लगने लगे कि आगे के रास्ते बंद हो गए हैं, तो इस सोच को बदलिए। नए रास्ते खुलेंगे। बस, रोशनी का इंतजार कीजिए।

मेहनत और धैर्य का कोई विकल्प नहीं

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October 24, 2020