सिर्फ मां ही नहीं हैं आप
Anokhi|August 29, 2020
सिर्फ मां ही नहीं हैं आप
मां बनना बेशक दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है। पर, मां की भी एक पहचान है, यह जानना जितना परिवार के लिए जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा खुद मां के लिए भी। पहचान का यह संकट मांओं को क्यों परेशान करता है और इससे उबरने के लिए क्या करें, बता रही हैं इंदिरा राठौर
इंदिरा राठौर

यह एक डांस शो था। जब वह स्टेज पर आईं तो निर्णायक मंडल ने एक-दूसरे का मुंह देखा। शायद वे सोच रहे थे कि बढ़े हुए वजन के साथ मंच पर खड़ी महिला बेली डांस कैसे करेगी? लेकिन जब महिला ने डांस शुरू किया तो लोग दांतों तले उंगली दबाने लगे। डांस खत्म होने के बाद निर्णायक मंडल ने खड़े होकर तालियां बजाई और पता चला कि डांसर एक ढाई वर्ष के बच्चे की मां भी है। प्रेग्नेंसी के बाद से उनकी डांस प्रैक्टिस छूट चुकी थी। वजन बढ़ गया था और उन्हें लगा कि शायद वह कभी दोबारा परफॉर्म नहीं कर पाएंगी। बेली डांसर के रूप में अपनी पहचान बनाने का उनका सपना धुंधलाता जा रहा था, जिसने उन्हें अवसाद में डाल दिया। लेकिन इसी बीच उन्हें एक रियलिटी शो के बारे में पता चला तो उन्होंने दोबारा प्रैक्टिस शुरू की। आश्चर्य नहीं कि वह एक बड़े रियलिटी शो का हिस्सा बन गईं। अब वह मातृत्व के साथ ही अपने पैशन का भी आनंद ले रही हैं।

मातृत्व का एहसास सबसे अनोखा और प्यारा होता है। लेकिन इसके पीछे अनगिनत जागकर बिताई गई रातें होती हैं, थकान, बेचैनियों, हार्मोनल बदलावों से गडमड होती दिनचर्या, मूड स्विंग्स, तनाव और सुस्ती की भी लंबी दास्तान होती है। इससे भी आगे बढ़कर अकसर आइडेंटिटी क्राइसिस या पहचान के संकट का सवाल मन को कुरेदता रहता है। कैसे पैदा होता है यह संकट और कैसे इससे उबरें, आइए जानें:

नई मां की चिंताएं

बहुत-सी लड़कियां मातृत्व के लिए करियर से ब्रेक लेती हैं। इनमें से कुछ तो दोबारा अपनी व्यस्त दिनचर्या लौटती हैं लेकिन बहुत सी माएं ऐसी भी होती हैं, जिनका ब्रेक बहुत लंबा या कभी-कभी स्थायी भी हो जाता है। मातृत्व बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन नई मांएं कभी-कभी अपनी पहचान खोने जैसी भावनाओं से भी गुजरती हैं। पेरेंटिंग एक्सपर्ट और लेखिका ग्रेस टिमोटी ने अपनी पुस्तक मम फेस में मातृत्व से जुड़े हर एहसास के अलावा नींद की कमी, पार्टनर के प्रति अकारण गुस्से और रिश्ते में आने वाले उतार-चढ़ाव, आशा- निराशा, काम पर लौटने को लेकर चिंता जैसे तमाम पहलुओं पर मजेदार ढंग से लिखा है। वह बताती हैं कि कैसे हर स्त्री मातृत्व के सुखद पलों के बीच अकसर अपनी पहचान खोने के संकट से भी गुजरती है।

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August 29, 2020