पापा जैसा कोई नहीं

Anokhi|June 20, 2020

पापा जैसा कोई नहीं
पापा तो सबके प्यारे होते हैं, अब अनूठे भी हो गए हैं। नए जमाने के पापा अब परवरिश की जिम्मेदारियां निभाने में खुशी-खुशी अपनी पत्नी की मदद कर रहे हैं। कल फादर्स डे है। इस मौके पर पापा की बदलती भूमिका के बारे में बता रही हैं, प्रतिमा पांडेय
प्रतिमा पांडेय

सदियों से बच्चों के पालन-पोषण का जिम्मा आमतौर से मां का ही माना जाता रहा है। इसीलिए शायद हमारे समाज में यह एक आम धारणा बन चुकी है कि ममता तो बस नारी का ही गुण है। फिर चाहे वह कुदरत का कोई भी रूप हो। इंसान या पशु-पक्षी, कोई भी। पर आज इस धारणा को गलत साबित कर देने वाले कई पुरुषों के उदाहरण हमारे सामने दिखाई देने लगे हैं।

पुणे के आदित्य तिवारी ने तो इस मामले में मिसाल ही कायम कर दी। उन्हें इस साल वूमन्स डे पर 'बेस्ट मम्मी ऑफ द वर्ल्ड' का अवॉर्ड मिला है। आदित्य डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त नन्हे अवनीश के सिंगल पेरेंट हैं। आदित्य को गोद लेने का अधिकार उन्हें दरअसल एक लंबी लड़ाई के बाद मिला, पर वो पीछे नहीं हटे। उन्होंने अवनीश के जिंदगी में आने के बाद अपनी आईटी फर्म की नौकरी छोड़ दी और अब स्पेशल बच्चों के पेरेंट्स की काउंसलिंग करते हैं। आदित्य की तरह आज के आम पिता बच्चों के लिए लंबी लड़ाई भले ही ना लड़ रहे हों, लेकिन अपने आसपास आपको कई ऐसे पिता मिल जाएंगे, जो पितृत्व की एक नई इबारत लिख रहे हैं। यह सुखद बदलाव उस समाज में हो रहा हैं, जहां कुछ दशक पहले पिता अपनी भूमिका कमाने और घर-परिवार की रक्षा तक सीमित मानते थे।

मजबूत हो रहा जुड़ाव

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June 20, 2020