चिट्ठी आई है
Champak - Hindi|October First 2020
चिट्ठी आई है
प्रियांशी घर की साफसफाई में अपनी नानीजी की मदद कर रही थी. आज सुबह से ही सारे घर की पुरानी चीजों से धूल हटाई जा रही थी, इधरउधर पड़े अखबार और कागज इकट्ठा किए जा रहे थे.
ललित शौर्य

सफाई करते हुए प्रियांशी को कुछ लिफाफे हाथ लगे. ये लिफाफे नानीजी की एक पुरानी डायरी को साफ करते हुए मिले थे.

प्रियांशी उन लिफाफों को बड़े ध्यान से देख रही थी. उन में कुछ लिखा था. वह पढ़ने का प्रयास कर रही थी, लेकिन वह स्पष्ट नहीं था, क्योंकि उन की स्याही उड़ चुकी थी.

"ये क्या पढ़ रही हो प्रियांशी," नानी ने प्रियांशी के हाथों में लिफाफे देखे तो पूछा.

“नानी, ये देखो, मुझे क्या मिला है. ये आप की पुरानी डायरी से निकला है. इस में कुछ लिखा है, लेकिन पढ़ने में नहीं आ रहा है. ये क्या है नानीजी?” प्रियांशी ने लिफाफा दिखाते हुए नानी से पूछा.

"ओह, तो तुम मेरी चिट्ठियां पढ़ रही हो?" नानी ने मुसकराते हुए कहा.

“चिट्ठियां? ये क्या होती हैं, नानी?” प्रियांशी ने हैरानी से कहा.

"ये मेरी चिट्ठियां हैं, जो मुझे कभी मेरी सहेली इंदु ने भेजी थीं. आजकल तो मोबाइल फोन का जमाना है. एसएमएस, व्हाट्सऐप और फेसबुक ने चिट्ठियों को निगल लिया है. वह दौर भी क्या था जब चिटिठयां आया करती थीं. चिट्ठियां लिखी जाती थीं. चिट्ठियों का बेसब्री से इंतजार होता था. क्या दिन थे वह भी," नानी ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा.

“नानी, क्या आप के जमाने में चिट्ठियों से बातें होती थीं,” प्रियांशी ने पूछा.

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