कैग्गी को सबक
Champak - Hindi|September Second 2020
कैग्गी को सबक
कैग्गी कंगारू चंपकवन में किराने की दुकान चलाता था. वह लालची और चतुर दुकानदार था.
संजू राय

भोलेभाले ग्राहकों को वह खूब ठगता था और रोजमर्रा के सामान की मनमानी कीमत वसूलता था. वह गलत तरीके से सामान तौलता था.

जंगल में दूसरी कोई दुकान नहीं थी. इसलिए मजबूरीवश सभी कैग्गी की दुकान से ही सामान खरीदते थे.

एक दिन मीकू चूहा, कैग्गी की दुकान पर चावल खरीदने आया और बोला, “कृपया दो किलो चावल देना?"

कैग्गी ने जब चावल तौलने शुरू किए तो मीकू ने कहा, "कैग्गी, ठीक से तौलना. तुम्हारे तराजू में कुछ गड़बड़ी है, क्योंकि पिछली बार भी तुम चावल दिए थे."

कैग्गी भड़क गया, “मीकू, तराजू बिलकुल ठीक है. तुम्हें विश्वास नहीं है तो दूसरी दुकान से जा कर खरीदो."

मीकू ने चावल लिए और चुपचाप चला गया,क्योंकि उस के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था.

अगले दिन ब्लैकी भालू अपने बच्चों के साथ

कैग्गी की दुकान पर पहुंचा. उस के बेटे का जन्मदिन था. ब्लैकी ने सामान की लिस्ट कैग्गी को दे कर कहा, “कृपया जल्दी से यह सामान दे दो.''

सारा सामान एक थैले में भर कर कैग्गी ने कहा, “ब्लैकी, आप का बिल 1000 रुपए हुआ."

"1000 रुपए, पर मेरे हिसाब से तो बिल 800 होना चाहिए, ब्लैकी बोला.

" "कुछ सामान के दाम बढ़ गए हैं, इसलिए 1000 रुपए हुए."

"यह क्या बात हुई. कल तक तो कीमतें कम थीं, आज अचानक कैसे बढ़ सकती हैं?" ब्लैकी ने सवाल किया.

“वह सब मैं नहीं जानता. अगर आप को सामान खरीदना है तो खरीदो वरना कहीं और जाओ,” कैग्गी ने घमंड से कहा.

दुकान पर जंपी बंदर भी सामान खरीद रहा था. उस ने पूछा, “कैग्गी, अचानक दाम कैसे बढ़ सकते हैं?"

कैग्गी ने जंपी को आंखें दिखाते हुए कहा, “मुझे समझाने की जरूरत नहीं है. अपना सामान खरीदो और जाओ."

आखिरकार, ब्लैकी के पास 1000 रुपए देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

दो दिन बाद कैग्गी की दुकान पर एक बंदर आया. वह आंखों पर धूप का चश्मा, सिर पर टोपी, सूटबूट पहन कर विदेशी सा लग रहा था. उस के कंधे पर एक बैग था.

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