लौट आईं खुशियां
Champak - Hindi|September Second 2020
लौट आईं खुशियां
"ले बेटा, केक का टुकड़ा खा ले, बहुत स्वादिष्ट है मोनू,” खुशी बिल्ली अपने मुंह में दबा कर केक का टुकड़ा बेटे मोनू के लिए ले कर आई.
इंद्रजीत कौशिक

मां इस से क्या "बस, इतना छोटा सा टुकड़ा, होगा?'' मोनू ने मुंह बिचकाया. 'कहीं मां नाराज न हो जाएं,' यह सोच कर वह उसे चुपचाप खाने लगा.

शर्मा मैडम के यहां खुशी बिल्ली काफी समय से रह रही थी इसलिए वह जब भी किचन में आती मैडम उसे कुछ न कुछ खाने को जरूर देती थीं. खुशी हमेशा खाने की चीज मिलबांट कर खाया करती थी.

इसलिए वह अपने बेटे को जरूर खिलाती थी. एक दिन मोनू किचन में घूम रहा था, जबकि उस की मां बाहर गई हुई थी. किचन में बहुत सी खानेपीने की चीजें पड़ी हुई थीं. मोनू ने आव देखा न ताव टेबल पर रखे बरफी के टुकड़े को मुंह में दबाया और चुपचाप बाहर निकल गया.

मोनू ने बड़े गर्व से मां को बरफी खाने के लिए कहा, "मां, मैं आप के लिए बरफी लाया हूं.' "

"अरे वाह, यह तो काफी स्वादिष्ट है. तुम इसे कहां से लाए हो?” खुशी ने बेटे से पूछा.

"मां, आप को आम खाने से मतलब है या गुठली गिनने से. खाओ और आनंद लो,” मोनू ने जवाब दिया.

"मेरा बेटा बड़ा हो गया है. मेरे लिए यह बड़ी खुशी की बात है, लेकिन एक बात हमेशा याद रखना बेटे कि कभी गलत काम मत करना,” इतना कह कर खुशी भोजन की तलाश में चल दी.

बस, उस दिन से मोनू को चोरी की आदत पड़ गई. अब तो वह अकसर किसी न किसी बहाने से किचन में घुस जाता और वहां से चोरी कर के खाने की चीजें चुरा लाता.

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