पशुपालन में उन्नत तकनीकियां
Farm and Food|March Second 2020
पशुपालन में उन्नत तकनीकियां
'समय से पहले चेते किसान' यह कहावत काफी पुरानी है. वैसे तो पशुओं के लिए साफ सुथरी खुली जगह होनी चाहिए, लेकिन साथ ही पशुपालक संतुलित आहार और उचित देखभाल कर के अपने पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं.

रोगों का प्रकोप कमजोर मवेशियों पर ज्यादा होता है, इसलिए उन की खुराक ठीक रख कर उन के भीतर बीमारियों से लड़ने की ताकत पैदा हो जाती है.

पशुओं को बीमारी से बचाने की दिशा में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली ने सराहनीय काम किया है. यह दुनिया का एक अग्रणी शोध संस्थान है. इस संस्थान ने पशुओं की सेहत और उत्पादन के क्षेत्र में बहुत शोध कर अनेक टीके, औषधियां व तकनीकें ईजाद की हैं.

इस के अलावा इस संस्थान ने अनेक बैक्टीरियल, वायरल व परजीवी रोगों जैसे गलघोंटू, लंगड़ी, खुरपकामुंहपका, शूकर बुखार, पीपीआर, एंटेरोटौक्सीमिया, भेड़बकरी चेचक, भैंस चेचक, एंथैक्स वगैरह के लिए टीकों और जांच किटों की खोज की है.

इस संस्थान द्वारा विकसित इन टीकों, रोग जांच किटों का इस्तेमाल पशुपालकों व पशु चिकित्सकों द्वारा लगातार किया जा रहा है. इस से उन की सेहत व उत्पादन में काफी सुधार हुआ है. साथ ही, विभिन्न बीमारियों से होने वाली पशुओं की मौत की दर में भी काफी कमी आई है.

पशुओं की सेहत के लिए टीके या वैक्सीन

गाय व भैंसों के लिए टीके : खुरपका और मुंहपका के टीके ईजाद करने के अलावा गलघोंटू, एंथैक्स, लंगड़ी, ब्रूसेलोसिस, भैंस चेचक, रेबीज वगैरह के टीके ईजाद किए गए.

बकरी और भेड़ के लिए ईजाद किए टीके : पीपीआर, भेड़ चेचक, बकरी चेचक, एंटेरोटौक्सीमिया, सीसीपीपी वगैरह. शूकरों यानी सूअरों के लिए टीका : शूकर बुखार टीका.

मुरगियों के लिए टीके : रानीखेत रोग, पक्षी चेचक, पक्षी स्पाइरोकीटोसिस, गमबोरो, एग ड्रौप सिंड्रोम, संक्रामक सांस नली शोथ,मेरेक्स रोग वगैरह.

कुत्तों के लिए टीके : रेबीज वगैरह. ये टीके और वैक्सीन पशुओं व कुक्कुटों में होने वाली बीमारियों की रोकथाम में काफी कारगर साबित हुए हैं. नतीजतन, किसानों की आमदनी में भी काफी इजाफा हुआ है.

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

March Second 2020