يحاول ذهب - حر
नीचराशिस्थ मंगल के फल
November 2025
|Jyotish Sagar
जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन
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प्रस्तुत श्रृंखला 'जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल' के अन्तर्गत विगत दो अंकों से नीचराशिस्थ मंगल के भावेश के रूप में फलों का वर्णन लग्नानुसार किया जा रहा है, जिसमें मेष से कर्क लग्न के फलों का वर्णन विगतांक तक कर चुके हैं। उसी क्रम में अब प्रस्तुत आलेख में सिंह और कन्या लग्न की कुण्डलियों में नीचराशिस्थ मंगल के भावेश के रूप में फलों का वर्णन किया जा रहा है।
सिंह लग्न में नीचराशिस्थ मंगल : सिंह लग्न की जन्मपत्रिका में मंगल चतुर्थेश-भाग्येश होकर 'योगकारक' होता है। योगकारक मंगल का अपनी नीचराशि कर्क में द्वादश भाव में स्थित होना सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता, जिसके फलस्वरूप एक ओर जहाँ जातक को पारिवारिक एवं भौतिक सुखों में कमी का अनुभव होता है, तो वहीं दूसरी ओर भाग्य में कमी भी देखने को मिलती है।
नैसर्गिक रूप से मंगल की द्वादश भाव में उपस्थिति शुभ नहीं मानी जाती। यह अवश्य है कि नीचराशिगत स्थिति के चलते उसके अशुभ फलों की तीव्रता में कुछ कमी देखने को मिलती है, परन्तु यहाँ स्थित मंगल स्वास्थ्य, व्यवहार एवं खर्चों की प्रवृत्ति के सम्बन्ध में सामान्यतः विपरीत फल देता है। जातक को ऑपरेशन आदि के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। वह दुर्घटना आदि का शिकार हो सकता है। इसके अलावा यहाँ स्थित मंगल किसी अपराध आदि के चलते सजा आदि भी करवा सकता है। द्वादश भाव का मंगल आकाशीय विद्युत् के सम्बन्ध में भी सावधानी रखने का संकेत देता है।
नैसर्गिक रूप से द्वादश भाव में स्थित मंगल के चलते इसकी या अन्य त्रिक भावस्थ ग्रहों की दशा में जातक की संगति अच्छी नहीं होती। व्यसन आदि के चलते जातक के खर्चे प्रायः अधिक रहते हैं।
चतुर्थेश का द्वादश भाव में अपनी नीचराशि में स्थित होना माता के स्वास्थ्य की दृष्टि से भी परेशानीदायक होता है। जातक माता के स्वास्थ्य को लेकर चिन्तित होता है और उसे अस्पताल आदि के चक्कर लगाने पड़ते हैं। चतुर्थेश की द्वादश भाव में उपस्थिति जातक की स्थायी सम्पत्ति से सम्बन्धित विवाद बढ़ाने वाली हो सकती है। इसके अतिरिक्त जातक अपनी सुख-सुविधा के लिए अधिक व्यय करने वाला, परन्तु उससे अधिक सन्तुष्ट नहीं होने वाला भी हो सकता है।
هذه القصة من طبعة November 2025 من Jyotish Sagar.
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