يحاول ذهب - حر
थिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मन्दिर दक्षिण की द्वारका में दर्शाती है चमत्कारी उपस्थिति
August 2025
|Jyotish Sagar
भारतभूमि अनेक ऋषि- मुनियों, देवी-देवताओं और अवतारों की लीलास्थली रही है। सतयुग से लेकर द्वापर युग तक भारतभूमि पर अनेक अवतार हुए हैं। इन्हीं अवतारों ने भारतभूमि पर कई चमत्कारी लीला रची हैं।
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ऐसा ही एक पावन स्थल भगवान् श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ा हुआ है, जो आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केन्द्र है। यह तीर्थस्थल थिरुवरप्पु स्थित भगवान् श्रीकृष्ण का मन्दिर है, जो कि केरल के कोट्टयम जिले में स्थित है। यह मन्दिर लगभग 1500 साल पुराना है, जो भक्तों को एक आध्यात्मिक साधना का अनुभव देता है। इसी कारण इसे 'दक्षिण का द्वारका' भी कहा जाता है।
बताया जाता है कि वनवास के दौरान पाण्डव भगवान् श्रीकृष्ण की मूर्ति की पूजा करते थे और उन्हें भोग लगाते थे। जब पाण्डवों का वनवास समाप्त हुआ, तो वे मछुआरों के कहने पर थिरुवरप्पु में ही श्रीकृष्ण की मूर्ति को छोड़कर चले गए। तब मछुआरों ने भगवान् श्रीकृष्ण की ग्राम देवता के रूप में पूजा करना प्रारम्भ किया। एक बार जब मछुआरे संकट में घिर गए, तो एक ज्योतिषी ने उनसे कहा कि आप प्रभु की पूजा ठीक प्रकार से नहीं कर पा रहे हैं।
هذه القصة من طبعة August 2025 من Jyotish Sagar.
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