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श्रावण मास में शिवोपासना

July 2025

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Jyotish Sagar

श्रावण मास शिवोपासना का प्रमुख महीना माना गया है।

श्रावण मास में शिवोपासना

इस माह में भगवान् शिव एवं माता पार्वती भक्त को शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं। शिव भक्तों को श्रद्धापूर्वक भगवान् शिव की पूजा-उपासना करनी चाहिए, ताकि उन्हें मनोवांछित लाभ मिल सके। इस माह में भगवान् शिव का जलाभिषेक विशेष महत्त्व रखता है। श्रावण मास में इन्द्रदेव की कृपा से वर्षा भी निरन्तर होती है।

नीलकण्ठ शिव का पर्याय

शिवजी की मूर्ति पर जल चढ़ाने के पीछे एक पौराणिक कथा भी है। सतयुग में देवताओं और दानवों के बीच अमृत प्राप्त करने के लिए सागर का मन्थन किया गया था। मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकि नाग को नेति (रस्सी) बनाया गया। भगवान् विष्णु ने कछुए का रूप धारण कर मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर रखा। कच्छपावतार के पीछे भी यही अन्तर्कथा है।

समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले थे-लक्ष्मी, ऐरावत हाथी, धन्वन्तरि (अमृत कलश के साथ) आदि। इसी प्रक्रिया में हलाहल विष भी प्रकट हुआ, जिसे किसी देवता ने स्वीकार नहीं किया। तब भगवान् शिव ने हलाहल विष को अपने कण्ठ में धारण किया। तभी से शिवजी को 'नीलकण्ठ' के नाम से भी पुकारा जाता है। विष से भगवान् महादेव का शरीर ऊष्मा (गर्मी) के कारण दग्ध होने लगा, तो उनकी देह (सिर) पर जल चढ़ाया गया। शिवजी के जलाभिषेक के पीछे यही पौराणिक कथा है।

समुद्र मंथन से विष श्रावण माह में ही निकला था। इसी कारण श्रावण माह में जलाभिषेक और शिवोपासना का विशेष महत्त्व होता है।

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