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يحاول ذهب - حر

कैसा रहेगा कुम्भ का राहु भारत के लिए?

May 2025

|

Jyotish Sagar

इस माह 29 तारीख को राहु (स्पष्ट) मीन राशि से निकलकर कुम्भ राशि में प्रवेश कर रहा है।

कैसा रहेगा कुम्भ का राहु भारत के लिए?

भारत की दृष्टि से राहु का गोचर परिवर्तन अधिक प्रभावशाली इसलिए माना जाता है, क्योंकि स्वतन्त्रताकालिक कुण्डली में अनन्तसंज्ञक कालसर्पयोग का निर्माण हो रहा है। इसके अतिरिक्त वर्तमान परिस्थितियों में राहु की महती भूमिका होने के कारण भी इस गोचर परिवर्तन के प्रति ज्योतिर्विद्वान् अपेक्षाकृत अधिक गम्भीर हैं। एक ओर जहाँ बड़े देश युद्ध की दहलीज पर खड़े हुए हैं। यूक्रेन और गज़ा के मामले अभी सुलझे नहीं हैं, तो वहीं अमेरिका और ईरान आमने-सामने खड़े हैं। अमेरिका-चीन का टैरिफ वॉर भी अन्तरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है। भारत के अपने पड़ोसियों से सम्बन्ध भी बहुत अच्छे नहीं हैं। चाहे पाकिस्तान या बांग्लादेश हो अथवा चीन हो, सभी ओर से आए दिन तनाव उत्पन्न होता है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव आदि में भी चीन के बढ़ते प्रभाव से भारत के समक्ष नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। कुम्भ राशि में राहु का गोचर भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में किस प्रकार के फल प्रदान करेगा? इसका पूर्वाकलन प्रस्तुत आलेख में किया जा रहा है।

राहु का कुम्भ राशि में गोचर भारत के स्वतन्त्रताकालिक चन्द्रमा से अष्टम भाव में रहेगा, जो कि शुभ नहीं कहा जा सकता। इसके अतिरिक्त लग्न से यह गोचर दशम भाव में रहेगा और स्वतन्त्रताकालिक राहु से भी यह दशम भाव में है, जो कि शुभ नहीं है। विशेषकर उस स्थिति में जब राहु लग्न में स्थित होकर अनन्तसंज्ञक कालसर्पयोग का निर्माण कर रहा है। जहाँ तक दशाओं का प्रश्न है, तो सितम्बर, 2025 तक चन्द्रमा में सूर्य की अन्तर्दशा है, जो कि कुछ हद तक अनुकूल कही जा सकती है। महादशानाथ एवं अन्तर्दशानाथ दोनों तृतीय भाव में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त सितम्बर, 2025 से मंगल की महादशा का आरम्भ होगा, जो कि स्वतन्त्रताकालिक कुण्डली में सप्तमेश-द्वादशेश होकर अकारक है तथा द्वितीय भावस्थ है। इसे शुभ नहीं कहा जा सकता। यह दशा नवीन चुनौतियाँ उत्पन्न करेंगी।

इस पृष्ठभूमि के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में राहु का यह गोचर भारत के लिए कैसा रहेगा? इसका पूर्वाकलन किया गया है।

राजनीतिक क्षेत्र

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