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يحاول ذهب - حر

महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा चिंता का सबब

January 22, 2026

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Jansatta Lucknow

रतीय खेल जगत में महिलाओं भा की भागीदारी और सफलता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, पर उनके उत्पीड़न, यौन शोषण और असुरक्षित वातावरण की घटनाएं भी बढ़ी हैं।

संयुक्त राष्ट्र महिला और यूनेस्को की साल 2023 रपट के अनुसार, भारत में लगभग एक-तिहाई महिला एथलीटों ने प्रशिक्षकों से यौन शोषण या अनुचित व्यवहार का सामना किया है।

वहीं, साल 2025 की रपट के अनुसार भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से निपटने और यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए कानून हैं, लेकिन अधिकारी इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने या यह सुनिश्चित करने में नाकाम रहे हैं और उन्होंने ऐसे मामले शिकायत समितियों पर छोड़ दिए।

हालांकि इन सभी मामलों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रवैया अपनाया है, जिससे महिला खिलाड़ियों को इन समस्याओं का सामना न करना पड़े।

ऐसे मामले न केवल महिलाओं की मानसिक स्थिति प्रभावित करते हैं, बल्कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में बाधा बनते हैं। सशक्तीकरण का अर्थ सिर्फ मैदान पर जीत नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल में विकास है।

सरकार की अस्मिता योजना ने साल 2025 में 15 खेलों में 852 लीग आयोजित कर 70,000 महिला एथलीटों को अवसर दिए, जो साल 2024 से 17,000 अधिक है। लेकिन सुरक्षा की कमी से यह प्रयास अधूरा रह जाता है।

हाल ही में निशानेबाजी से जुड़े प्रशिक्षक अंकुश भारद्वाज पर एक नाबालिग निशानेबाज ने यौन शोषण का आरोप लगाया। एफआइआर दर्ज की गई और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ ने अंकुश को प्रशिक्षक पद से निलंबित कर दिया।

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