يحاول ذهب - حر
झूठे आरोपों पर टिका विपक्ष
November 23, 2025
|Dainik Jagran
विपक्ष को भाजपा की राजनीतिक बढ़त रोकनी है तो उसे ऐसा नैरेटिव बनाना होगा, जिससे लोगों का भरोसा मिल सके। यह झूठे आरोपों के सहारे नहीं हो सकता
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नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में दसवीं बार शपथ ले ली और मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी हो गया, पर यह चर्चा थम नहीं रही कि आखिर राजग ने इतनी प्रचंड जीत कैसे हासिल कर ली। चुनावी जीत कई कारणों पर निर्भर करती है। बिहार में राजग की जीत के भी कई कारण रहे। एक बड़ा कारण रहा जदयू-भाजपा के साथ उसके अन्य सहयोगी दलों के बीच बेहतर सीट बंटवारा और तालमेल। इसके अलावा एक अन्य प्रमुख कारण है नीतीश कुमार के 20 साल के शासन में बिहार का पटरी पर आना। इसका संज्ञान इसलिए अधिक लिया गया, क्योंकि इसके पहले लालू-राबड़ी यादव का शासनकाल इस कदर जंगलराज का पर्याय बन गया था कि पिछले चुनावों की तरह इस चुनाव में भी मुद्दा बना और उसने अपना असर भी दिखाया। विपक्ष यह सब देखने से इन्कार कर रहा है। विपक्षी दल और विशेष रूप से कांग्रेस वोट चोरी का ही राग अलाप रही है। वोट चोरी का आरोप चुनावों के पहले तभी उछाल दिया गया था, जब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर कराना शुरू ही किया था। विपक्ष ने वोट चोरी का आरोप लगाकर धरना-प्रदर्शन करने के साथ वोटर अधिकार यात्रा तक निकाली, लेकिन चुनाव आते-आते यह कोई मुद्दा ही नहीं रहा। चुनाव बाद के आंकड़े यह बताते हैं कि कुछ ऐसे क्षेत्र जहां बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे, वहां कहीं राजग जीता तो कहीं विपक्ष। ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया कि राजग को एसआइआर का लाभ मिला। मतदाता सूची से लाखों नाम कट जाने के बाद भी किसी ने यह शिकायत नहीं की कि उसका नाम गलत तरीके से काट दिया गया है। यानी जो नाम कटे, वे सही कटे। यदि ऐसा नहीं होता तो लोगों ने सड़कों पर उतरकर शिकायत की होती। ऐसे लोगों को सामने लाकर राजनीतिक दल भी शिकायत नहीं कर सके तो इसीलिए क
هذه القصة من طبعة November 23, 2025 من Dainik Jagran.
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