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शीतकालीन सत्र में पेश तीन विधेयक और बजट
December 25, 2025
|Business Standard - Hindi
संसद के शीतकालीन सत्र का भविष्य की बजट निर्माण प्रक्रिया पर अहम असर होगा। इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं एके भट्टाचार्य
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भारतीय संसद के कुछ ही शीतकालीन सत्रों ने केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति पर उतना प्रभाव डाला है जितना पिछले सप्ताह समाप्त हुए सत्र ने डाला। गत 19 दिसंबर को समाप्त हुए एक पखवाड़े लंबे शीतकालीन सत्र को इस बात के लिए भी उचित ही याद किया जाएगा कि सरकार ने कई विधेयक बहुत कम समय में पेश किए और उन्हें गहन जांच के लिए संसदीय समितियों के पास भेजने की विपक्ष की मांग को अनदेखा कर दिया।
परंतु, इसके अलावा भी इस पर चर्चा बहुत कम हुई है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किए गए तीन विधेयकों का वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आगामी 2026-27 के बजट पर किस तरह का असर होगा।
शुरुआत करते हैं 'हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस एक्ट, 2025’ से। इस नए कानून के जरिये पान मसाला जैसी वस्तुओं के उत्पादन या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य वस्तुओं के उत्पादन पर एक उपकर लगाया गया।
इस कदम का एक संदर्भ है। तीन सितंबर 2025 को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी की चार कर दरों वाली व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाते हुए जीएसटी को तीन दरों वाली व्यवस्था में बदल दिया गया। आवश्यक और प्राथमिकता क्षेत्र की वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए 5 फीसदी की रियायती दर, अधिकांश वस्तुओं के लिए 18 फीसदी की मानक दर, और चुनी हुई नुकसानदेह और विलासिता की वस्तुओं की सूची पर 40 फीसदी की दंडात्मक दर लगाई गई।
नई दर व्यवस्था 22 सितंबर से लागू हो गई। नई दरों के लागू होते ही, जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस, जो विभिन्न दरों पर लगाया जाता था, सभी वस्तुओं पर समाप्त कर दिया गया, सिवाय तंबाकू और उससे संबंधित उत्पादों के जिनमें पान मसाला भी शामिल है। तंबाकू उत्पादों पर सेस तब तक जारी रहना था जब तक केंद्र सरकार कोविड महामारी के दौरान राज्यों को राजस्व की कमी की भरपाई के लिए लिए गए बकाया ऋण (ब्याज सहित) का भुगतान नहीं कर देती। उपलब्ध संकेतों के अनुसार, यह पुनर्भुगतान दायित्व दिसंबर 2025 के अंत तक पूरा हो जाना चाहिए। यही वह जगह है जहां 'हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस अधिनियम, 2025' का महत्त्व और उसके केंद्रीय बजट के लिए निहितार्थ सामने आते हैं।
هذه القصة من طبعة December 25, 2025 من Business Standard - Hindi.
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