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सिंहावलोकन 2025: नक्सल मुक्त भारत के लिए निर्णायक रहा बीता वर्ष
January 01, 2026
|Aaj Samaaj
वर्ष 2025 भारत के आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक दुर्लभ क्षण के रूप में दर्ज होगा।
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भारत ने हिंसा का मुकाबला सिर्फ सीमाओं पर नहीं किया, बल्कि उसकी जड़ों तक जाकर निर्णायक लड़ाई लड़ी।कई दशकों में पहली बार भारत ने अपने सबसे बड़े आंतरिक खतरे से प्रभावी ढंग से निपटते हुए वामपंथी उग्रवाद की सशस्त्र गतिविधियों पर निर्णायक चोट की। दशकों तक वामपंथी उग्रवाद ने राज्य की क्षमता को कमजोर किया, जन-जीवन को संकट में डाला और संवेदनशील क्षेत्रों में विकास को बाधित किया। इसके बावजूद भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि स्थायी राजनीतिक संकल्प और संस्थागत समन्वय के माध्यम से चिरस्थायी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। वर्ष 2025 में भारत ने छिटपुट कार्रवाइयों से आगे बढ़कर समग्र आंतरिक सुरक्षा रणनीति अपनाई। सशस्त्र माओवादी तत्वों के विरुद्ध सटीक अभियान और साथ ही लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्रों में शासन, अवसंरचना और पुनर्वास का विस्तार किया। इसके परिणाम स्पष्ट रहे, विद्रोही गतिविधियों का भौगोलिक दायरा संकुचित हुआ, उग्रवादी नेतृत्व संरचनाएं ध्वस्त हुई और बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण हुए। 2025 के अंत के साथ ही मोदी सरकार का यह ऐलान केंद्र में बना हुआ है कि 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सलमुक्त कर दिया जाएगा। अब जब लक्ष्य तक पहुंचने में तीन महीने से थोड़ा ही अधिक समय बचा है और सीपीआई (माओवादी) का संगठनात्मक ढांचा काफी हद तक टूट चुका है, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकने वाला दिखाई देता है। वर्ष 2013 में 182 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे, जबकि अब 2025 में प्रभावित जिलों की संख्या केवल 11 रह गई है। नक्सल मुक्त भारत बनाने के मोदी सरकार के विजन की दिशा में एक बड़े कदम के तहत, नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 6 से घटाकर 3 पर ला दी गई है। अकेले साल 2025 में ही, सुरक्षा बलों ने 335 नक्सलों को निष्क्रिय किया, 2167 से अधिक आत्मसमर्पण कराए और 942 गिरफ्तारियाँ कीं। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के तहत 27 कट्टर नक्सलों को निष्क्रिय किया गया। 24 मई 2025 को बीजापुर में 24 कट्टर नक्सलों ने आत्मसमर्पण किया। नवंबर 2025 में आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले के मारेडुमिल्ली वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलों के बीच हुई मुठभेड़ में 6 माओवादी मारे गए। मृतकों में वरिष्ठ माओवादी नेता और केंद्रीय समिति के सदस्य मड़वी हिड़मा, उनकी पत्नी राजे तथा
هذه القصة من طبعة January 01, 2026 من Aaj Samaaj.
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