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मौजूदा आपाधापी में बचपन बचाने की दरकार

November 05, 2025

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Aaj Samaaj

छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई आत्महत्या कई सवाल खड़े करती है। उसकी मौत इतनी दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली है, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। घटना के बाद छात्रा की मां स्कूल आई। उस मां ने चीत्कार के साथ कहा कि आई किल्ड माई डॉटर। आप अंदाजा लगाने की कोशिश कीजिए कि उस मां पर क्या बीत रही होगी ! वह आजीवन इस आत्म ग्लानि से कैसे उबर पाएगी।

- अमित बैजनाथ गर्ग

इस आत्म ग्लानि से कैसे उबर पाएगी। वह अपनी बेटी के मन में पनपती उस पीड़ा को भी नहीं समझ पाई, जिसका अंजाम इतना दर्दनाक निकला। असल में यह घटना कई सवालों पर सोचने के लिए मजबूर करती है। सबसे पहला सवाल तो यह है कि आखिर इतने छोटे बच्चे आत्महत्या जैसा बड़ा कदम क्यों उठा रहे हैं? दूसरा हम अपने बच्चों को कैसी शिक्षा व्यवस्था में ढाल रहे हैं। तीसरा सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर बच्चे मानसिक रूप से इतने कमजोर क्यों हो रहे हैं? ये सवाल आपस में एकदूसरे से गहरे तक जुड़े हुए हैं। असल में आत्महत्या का प्रयास करने वाले अधिकांश बच्चे मानसिक स्वास्थ्य विकार और अवसाद से ग्रस्त हो रहे हैं। छोटे बच्चों में आत्महत्या के प्रयास अक्सर आवेगपूर्ण होते हैं। ये प्रयास उदासी, भ्रम, क्रोध या ध्यान और अति सक्रियता संबंधी समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। वहीं उन पर पढ़ाई और सबसे आगे रहने का दबाव भी बना हुआ है। हमारी शिक्षा प्रणाली उन पर इतना दबाव बना देती है कि वे मानसिक अवसाद में आ जाते हैं और पढ़ाई का बोझ सहन नहीं कर पाते। यह रट्टा मार शिक्षा व्यवस्था हमारे नौनिहालों के जीवन पर भारी पड़ रही है। असल में बच्चों से लेकर युवाओं तक में आत्महत्या एक गंभीर समस्या बनी हुई है। एक अनुमान के अनुसार, 15 से 24 वर्ष की आयु के बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों में आत्महत्या मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। किशोरों में आत्महत्या के प्रयास तनाव, आत्म-संदेह, सफलता का दबाव, वित्तीय अनिश्चितता, निराशा और नुकसान की भावनाओं से जुड़ी हो सकती है। वहीं कुछ किशोरों के लिए आत्महत्या उनकी समस्याओं का समाधान लग सकती है। आत्महत्या के विचार और प्रयास अक्सर अवसाद से जुड़े होते हैं। अवसाद के अलावा अन्य जोखिम कारक भी हैं, जैसे आत्महत्या के प्रयासों का पारिवारिक इतिहास। हिंसा के संपर्क में आना। आवेगशीलता। आक्रामक या विघटनकारी

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