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يحاول ذهب - حر

जान बचेगी तब तो पढ़ेंगे

August 13, 2025

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India Today Hindi

मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा सरकारी भ्रष्टाचार. घटिया निर्माण, कम दरों पर ठेके और देखभाल की अनदेखी के कारण रोज गिर रहीं स्कूली इमारतें. राजस्थान में जर्जर स्कूलों की हालत बयान करती ग्राउंड रिपोर्ट

- आनंद चौधरी

जान बचेगी तब तो पढ़ेंगे

झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव की गलियों में अब स्कूल की घंटी नहीं, रोती हुई मांओं की चीखें गूंज रही हैं. हफ्ते भर पहले तक जिन बच्चों की हंसी से पूरा गांव गुलजार था, अब उन मासूमों के नाम मुर्दाघर और सरकारी मुआवजे की फाइलों में दर्ज हैं. इसी गांव के छोटूलाल 25 जुलाई की सुबह साढ़े सात बजे अपने सात साल के बेटे कान्हा और 10 साल की बेटी मीना को स्कूल छोड़कर खेत की तरफ निकले थे. वे कुछ ही दूर गए होंगे कि गांव में शोर-शराबा सुनाई दिया. छोटूलाल गांव की तरफ दौड़े. पूरा गांव स्कूल में जमा था. छोटूलाल कुछ देर पहले जिस कमरे में बच्चों को छोड़कर गए थे वह जमींदोज हो चुका था. गांव के लोग मलबे के ढेर से बच्चों को बाहर निकालने में जुटे थे. छोटूलाल भी मलबे के ढेर में अपने बच्चों को ढूंढने लगे. पांच मिनट बाद एक ग्रामीण मीना को गोद में उठाए दिखाई दिया तो वे तुरंत उस तरफ लपके मगर तब तक मीना की सांसें थम चुकी थीं. कुछ मिनट बाद ही गांव का एक नौजवान कान्हा को गोद में उठाए उनके पास आया. कान्हा भी दम तोड़ चुका था. अपने दोनों बच्चों को खोने के सदमे में छोटूलाल भी बेसुध होकर उसी मलबे के ढेर पर गिर पड़े. जख्मी बच्चों के साथ उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस हादसे में संतान खोने वाले छोटूलाल अकेले नहीं थे. इसी गांव के बीरमचंद, बाबूलाल, लक्ष्मण और हरकचंद भी अपने बच्चे खो चुके थे. पिपलोदी के नजदीक चांदपुरा गांव के उधमसिंह की बेटी प्रियंका की जान भी इस हादसे में चली गई. 25 जुलाई की सुबह झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव के सरकारी स्कूल के कमरे ढह जाने से सात बच्चों की मौत हो गई और 21 घायल हो गए. 26 जुलाई की सुबह इस गांव से छह बच्चों की अर्थियां एक साथ उठीं. पांच बच्चों का तो अंतिम संस्कार भी एक ही चिता पर किया गया. प्रशासन की संवेदनहीनता देखिए कि जल्द से जल्द अंतिम संस्कार करने की जिद में शवों को जलाने के लिए पर्याप्त लकड़ियों की भी व्यवस्था नहीं की गई. लकड़ियों के साथ टायर डालकर मासूमों के शवों को जलाया गया. जिसने भी यह दृश्य देखा उसकी रूह कांप उठी.

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