يحاول ذهب - حر
बिजली और विकास के आगे खैर मनाती खेजड़ी
June 25, 2025
|India Today Hindi
पारिस्थितिकी के लिहाज से संवेदनशील राजस्थान में विकास के नाम पर राज्य वृक्ष खेजड़ी की कटाई से आम लोग और पर्यावरणविद् चिंतित
मरुभूमि राजस्थान में जिस खेजड़ी के पेड़ को बचाने के लिए 295 साल पहले खेजड़ली बलिदान जैसी अमर गाथा रची गई, वही आज बेतरतीब विकास की भेंट चढ़कर अपने अस्तित्व का संकट झेल रहा है. खेजड़ली गांव के 363 लोगों के बलिदान को बिसराकर रेगिस्तान में सोलर और विंड प्रोजेक्ट के नाम पर आए दिन खेजड़ी के हजारों पेड़ों की बलि ली जा रही है. पर्यावरणविदों का आकलन बताता है कि पिछले 15 साल में राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जिलों में सोलर और विंड प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए करीब 25 लाख पेड़ों की बलि ली जा चुकी है. गौरतलब है कि पिछले डेढ़ दशक में राजस्थान में डेढ़ लाख बीघा क्षेत्र में 28,620 मेगावाट क्षमता के सोलर और विंड प्रोजेक्ट लगाए गए हैं. इनके लिए यहां वर्षों से मौजूद खेजड़ी, जाल, रोहिड़ा और देशी बबूल जैसे पेड़ों का सफाया किया जा चुका है. सरकार ने आने वाले पांच साल में सूबे में 90,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसके लिए तीन लाख बीघा अतिरिक्त जमीन की जरूरत होगी. ऐसे में 45-50 लाख पेड़ों की बलि और चढ़ सकती है. रेगिस्तान में एक बीघे में खेजड़ी, बबूल, जाल और रोहिड़े के औसतन 15-16 पेड़ होते हैं. विडंबना ही है कि हरे-भरे पेड़ों की बलि ग्रीन एनर्जी के नाम पर ली जा रही है.
बीकानेर के महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रभारी प्रोफेसर अनिल कुमार छंगाणी कहते हैं, "अनियोजित सोलर और विंड प्रोजेक्ट के कारण रेगिस्तान की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है. लाखों पेड़ काटकर सोलर पैनल लगाए जाने से इनके आस-पास के क्षेत्रों का तापमान 2 से 5 डिग्री तक बढ़ा है. सोलर पार्क के लिए पेड़ों की बलि देना रेगिस्तान के जन-जीवन को खतरे में डालना है."هذه القصة من طبعة June 25, 2025 من India Today Hindi.
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