Facebook Pixel {العنوان: سلسلة} | {اسم المغناطيس: سلسلة} - {الفئة: سلسلة} - اقرأ هذه القصة على Magzter.com

يحاول ذهب - حر

उदास कर गया जुबिन का यूं चले जाना

October 2025

|

DASTAKTIMES

देहरादून में जन्मे लोकप्रिय लोक गायक जुबिन गर्ग का एक हादसे में यूं चले जाना न केवल पूर्वोत्तर राज्य असम नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक बहुत तकलीफदेह घटना है। असम आज भी रो रहा है। वरिष्ठ पत्रकार अवंतिका की रिपोर्ट।

उदास कर गया जुबिन का यूं चले जाना

एक ऐसी आवाज़ जो पीढ़ियों को जोड़ती थी, जिनकी सुरमयी रूह सीधे दिल को छू जाती थी, वो आवाज़ एक दर्दनाक हादसे में हमेशा के लिए खामोश हो गई। पिछले महीने 19 सितंबर को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान एक दुर्घटना में 52 साल के मशहूर सिंगर जुबिन गर्ग की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंगर की मौत दौरे के कारण हुई। वह सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल को अटेंड करने के लिए गए थे, जहां उन्हें 20 सितंबर को परफॉर्म करना था। उनकी मौत को कई दिन गुजर चुके हैं लेकिन असम में अब भी मातम परसा है, लोगों की आंखें नम हैं। वहां की गलियों में हर धड़कन, हर सांस अब भी सिर्फ एक ही नाम पुकार रही है, जुबिन गर्ग...।

14 जून, 1989 को उत्तराखंड के देहरादून शहर जन्मे जुबिन को बचपन से ही संगीत का बहुत शौक था। गर्ग का करियर तब शुरू हुआ जब वह सिर्फ़ 19 साल के थे और कॉलेज में थे। 1992 में रिलीज़ हुआ उनका पहला म्यूज़िक एल्बम 'अनामिका' तुरंत चार्टबस्टर बन गया। उनकी पॉपुलैरिटी के ग्राफ का ऊपर चढ़ना असम में अलगाववादी समूहों से जुड़ी हिंसा के दौर के साथ शुरू हुआ। प्रेम, आशा और निराशा से भरे, आकर्षक धुनों से सजे उनके जीवंत संगीत ने तनावपूर्ण सामाजिक परिवेश में ताज़गी का संचार किया। वर्ष 2000 में जब गर्ग ने असमिया फिल्म 'तुमी मोर माथो मोर' से अभिनय और निर्देशन में पदार्पण किया, तब तक उनकी लोकप्रियता नई ऊंचाइयों को छू चुकी थी। उनका चेहरा नियमित रूप से बड़े-बड़े बिलबोर्डों पर छपता था और उनके गाने बाजारों, बसों, कॉलेज के कार्यक्रमों और सामाजिक समारोहों में सुने जाते थे।

المزيد من القصص من DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

क्या रंग लाएगा योगी का विकास मॉडल

अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

time to read

8 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

हेमंत का मास्टर स्ट्रोक झारखंड में 'पेसा' को मंजूरी

लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार झारखंड कैबिनेट ने पेसा (PESA) नियमावली को मंजूरी दे दी है।

time to read

5 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

खिड़की जो बंद हो गई!

दीवार में एक खिड़की रहती थी। वह जागती आंखों में सपने बुनती थी।

time to read

6 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

अब तक हजारों शिकायतें निस्तारित

यह बेहद सूझबूझ वाला अभिनव कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस नए प्रयोग का मकसद शासन-प्रशासन को सीधे जनता के बीच ले जाना है ताकि दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों के लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

time to read

2 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

एक सदी औरतों के नाम

इसे ऐतिहासिक घटना के रुप में क्यों न देखें हम

time to read

5 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

गांव-गांव चली धामी सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जन-जन के द्वार 'अभियान से लिखा जा रहा सुशासन का नया अध्याय

time to read

6 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

मासूम तानाशाह

किम जू ऐ की कुमसुसान समाधि स्थल की पहली सार्वजनिक यात्रा ने संकेत दिए कि वह उत्तर कोरिया की बन सकती हैं अगली उत्तराधिकारी

time to read

10 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

पर्वतीय विकास और चारधाम कनेक्टिविटी का नया अध्याय

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, अपनी आध्यात्मिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और सामरिक महत्व के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है।

time to read

7 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

बिहार के लिए नबीन के मायने

बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन की 23 दिसंबर की पहली बिहार यात्रा औपचारिक रूप से सम्मान समारोह के रूप में प्रस्तुत की गई। लेकिन राजनीतिक तौर पर यह एक सोचा-समझा कदम था जिसका मकसद उनकी सोच, संगठन की प्राथमिकताओं, नेतृत्व शैली और राजनीतिक मिज़ाज को दिखाना था। पटना हवाई अड्डे से लेकर मिलर स्कूल मैदान तक, जहां सम्मान समारोह आयोजित किया गया था, हर दृश्य संतुलित था, उत्सव था, लेकिन शोर-शराबा नहीं, प्रमुखता थी, लेकिन आत्मप्रदर्शन नहीं।

time to read

2 mins

January 2026

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

राम कृपा नासहिं सब रोगा

प्रत्येक मानव के भीतर परमात्मा की अखण्ड सत्ता विद्यमान है और वही सारी शक्ति, आनन्द, ज्ञान और प्रेम का स्रोत है। भोजन से शक्ति, धन से सुख, पुस्तकों से ज्ञान और सम्बन्धियों से अपनत्व मानना ही इस सत्ता का निरादर एवं पाप है जिसका परिणाम रोग, वियोग, मलिनता और आवागमन है। श्रीमानस में दुःख को पाप का परिणाम कहा गया है।

time to read

2 mins

January 2026

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size