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يحاول ذهب - حر

खेती किसानी अब महंगा सौदा

January 2025

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DASTAKTIMES

नई सदी में कृषि के क्षेत्र में भारत ने कई झंडे गाड़े। दुनिया में दुग्ध उत्पादन में हम पहले और फलों एवं सब्जियों के उत्पादन में दूसरे स्थान पर आ चुके हैं। साल 1950 में खाद्यान्न पैदावार पांच करोड़ टन थी और आज 50 करोड़ टन है लेकिन विडंबना देखिए, देश की आधी आबादी खेती-किसानी में लगी है, बावजूद इसके कृषि का जीडीपी में योगदान केवल 17 फीसदी है। यानी एक बड़ी आबादी खेती के नाम पर पल रही है। जिसका देश के विकास में कोई सीधा योगदान नहीं है। यह वे लाखों किसान और उनके आश्रित हैं जो खेती छोड़ना चाहते हैं क्योंकि यह एक महंगा सौदा हो चुकी है। भारत में खेती-किसानी के हाल का ब्योरा पेश कर रहे हैं कृषि विशेषज्ञ अखिलेश मिश्र।

- अखिलेश मिश्र

खेती किसानी अब महंगा सौदा

पिछले 20 सालों में एक अजब ट्रेंड देखने को मिला है। अर्थव्यवस्था के विकास में मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों का योगदान तेजी से बढ़ा है, जबकि कृषि क्षेत्र के योगदान में गिरावट हुई आई है। 1950 के दशक में जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान जहां 50% था, वहीं स्थिर मूल्यों पर ये 2015-16 में गिरकर 15.4% ही रह गया। कुछ तथ्यों पर गौर करें, भारत का खाद्यान्न उत्पादन प्रत्येक वर्ष बढ़ रहा है और हमारा देश गेहूं, चावल, दालों, गन्ने और कपास जैसी फसलों के मुख्य उत्पादकों में से एक है। यह दुग्ध उत्पादन में पहले और फलों एवं सब्जियों के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। दाल उत्पादन में भारत का 25% का योगदान था जो कि किसी एक देश के लिहाज से सबसे अधिक है। इसके अतिरिक्त चावल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 22% और गेहूं उत्पादन में 13% थी। पिछले कई वर्षों से दूसरे सबसे बड़े कपास निर्यातक होने के साथ-साथ कुल कपास उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 25% है। हालांकि अनेक फसलों के मामलों में चीन, ब्राजील और अमेरिका जैसे बड़े कृषि उत्पादक देशों की तुलना में भारत की कृषि उपज कम है। गौरतलब है कि चावल उत्पादन में भारत का स्थान तीसरा है लेकिन उसकी उपज ब्राजील, चीन और अमेरिका से कम है। केवल पिछले पांच वर्षों के दौरान कृषि क्षेत्र में खाद्यान्नों के उत्पादन और उत्पादकता में शानदार प्रगति देखी गई है। तिलहन, वाणिज्यिक फसलें, फल, सब्जियां, खाद्यान्न, मुर्गीपालन और डेयरी के क्षेत्र में भारत एक बड़ा नाम बनकर उभरा है। दुनिया में भारत फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। वहीं काजू और मसालों का वह सबसे बड़ा निर्यातक है।

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