يحاول ذهب - حر
भारतीय संस्कृति में वसंत पंचमी का महत्व
February 2024
|DASTAKTIMES
वसंत पंचमी को पर्व के रूप में मनाए जाने के पीछे कई तरह की मान्यताएं हैं। ऐसा माना जाता है कि वसंत पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती का अवतरण हुआ था। मान्यता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना करने के बाद मनुष्य की रचना की। इसके बाद उन्होंने अनुभव किया कि मनुष्य की रचना मात्र से ही सृष्टि की गति को संचालित नहीं किया जा सकता।
वसंत पंचमी एक ओर जहां ऋतुराज के आगमन का दिन है, वहीं यह विद्या की देवी और वीणावादिनी सरस्वती की पूजा का भी दिन है। ग्रंथों के अनुसार वाग्देवी सरस्वती ब्रह्मस्वरूपा, कामधेनु तथा समस्त देवों की प्रतिनिधि हैं। ये ही विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी हैं। इसीलिए इस दिन विद्या तथा संगीत की देवी की पूजा की जाती है। अमित तेजस्वनी व अनंत गुणशालिनी देवी सरस्वती की पूजा-आराधना के लिए माघमास की पंचमी तिथि निर्धारित की गई हैं। वसंत पंचमी को इनका आविर्भाव दिवस माना जाता है। अतः वागीश्वरी जयंती व वसंत पंचमी नाम से भी यह तिथि प्रसिद्ध है।
वसंत पंचमी को पर्व के रूप में मनाए जाने के पीछे कई तरह की मान्यताएं हैं। ऐसा माना जाता है कि वसंत पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती का अवतरण हुआ था। मान्यता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना करने के बाद मनुष्य की रचना की। इसके बाद उन्होंने अनुभव किया कि मनुष्य की रचना मात्र से ही सृष्टि की गति को संचालित नहीं किया जा सकता। उन्होंने अनुभव किया कि निःशब्द सृष्टि का औचित्य नहीं है, क्योंकि शब्दहीनता के कारण विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं था और अभिव्यक्ति के माध्यम के नहीं होने के कारण ज्ञान का प्रसार नहीं हो पा रहा था। इसके बाद उन्होंने विष्णु से अनुमति लेकर एक चतुर्भुजी स्त्री की रचना की, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी। ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावाद और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। यह विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण यह संगीत की देवी भी हैं। वसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं।

هذه القصة من طبعة February 2024 من DASTAKTIMES.
اشترك في Magzter GOLD للوصول إلى آلاف القصص المتميزة المنسقة، وأكثر من 9000 مجلة وصحيفة.
هل أنت مشترك بالفعل؟ تسجيل الدخول
المزيد من القصص من DASTAKTIMES
DASTAKTIMES
गलत मुद्दे पर दांव!
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी एसआईआर को मुद्दा बनाने की तैयारी में दिख रही है
9 mins
December 2025
DASTAKTIMES
तरक्की से कदम ताल !
बीते महीने झारखंड ने 15 नवंबर को अपना 25वां स्थापना दिवस मनाया।
4 mins
December 2025
DASTAKTIMES
यूपी में विपक्ष सदमे में
बिहार के चुनावी नतीजों से विपक्ष में मंथन शुरू
6 mins
December 2025
DASTAKTIMES
मौत से बेतरह डरते थे धर्मेंद्र
धर्मेंद्र को जिंदगी से बेपनाह मुहब्बत थी। वह नब्बे के हो चले थे।
2 mins
December 2025
DASTAKTIMES
गहरे सदमे में तेजस्वी
अति आत्मविश्वास तेजस्वी को ले डूबा।
5 mins
December 2025
DASTAKTIMES
अब प्रशांत किशोर का क्या होगा ?
शर्मनाक पराजय के बाद प्रशांत किशोर ने मीडिया के सामने आगे की जो रणनीति साझा की उससे साफ है कि वह अपने तौर-तरीकों में जरा भी बदलाव नहीं लाने जा रहे हैं।
6 mins
December 2025
DASTAKTIMES
धामी की राजस्व रणनीति
आर्थिक प्रबंधन में उत्तराखंड की ऊंची उड़ान
3 mins
December 2025
DASTAKTIMES
चिकोटी काटा, बकोटा नहीं
सुप्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार व कई अख़बारों के संपादक रहे नवीन जोशी पर आई नई किताब 'नवीन धुन' इन दिनों चर्चा में है। इस किताब में सत्तर के दशक से लेकर नई सदी के शुरुआती सालों की पत्रकारिता की एक धुन सुनाई देती है। ऐसी धुन जो मौजूदा दौर के पत्रकारों और पत्रकारिता की ट्रेनिंग ले रहे छात्रों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं। प्रस्तुत है इस नई पुस्तक के कुछ अंश।
11 mins
December 2025
DASTAKTIMES
इतना आसान नहीं बिहार का सफ़र
नीतीश की नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। आगे बीजेपी को बिहार पर राज करना है तो किए गए वादे निभाने होंगे।
11 mins
December 2025
DASTAKTIMES
सदाबहार धर्मेंद्र... अलविदा
एक अभिनेता और एक दिग्गज स्टार के रूप में अपनी उम्र के साठ से ज़्यादा सालों के शानदार सफर में, धर्मेंद्र को 'ही मैन' और 'गरम धरम' दोनों नामों से पुकारा जाता रहा।
4 mins
December 2025
Listen
Translate
Change font size
